केंद्र प्रदेश की वर्तमान सरकारों के साथ ही पूर्व सरकारें भी जिलों सड़कों और संस्थानों के नाम बदलती रहीं हैं। उत्तर प्रदेश में कई जिले ऐसे हैं जिनके नामकरण पिछले एक दशक में हुए तो कई महत्वपूर्ण सड़कों के नाम भी बदले जा चुके हैं आज एक खबर पढ़ी कि एनसीआर जीएम नरेश पाल सिंह की मौजूदगी में हुई सांसदों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सतीश गौतम ने अपने जिले के निकट दाउद खां रेलवे स्टेशन का नाम महापुरूष के नाम पर रखने का सुझाव दिया उनका कहना था कि यहां आसपास महाराणा प्रताप के वंशज रहते है। इसलिए रेलवे स्टेशन का नाम किसी महापुरूष के नाम पर हो क्योंकि यहां वंदेमातरम् आदि ट्रेनें भी रूकने की मांग दोहराई गयी इसी दौरान बैठक में पहुंची राज्यसभा सदस्य गीता शाक्य फफूंद स्टेशन का नाम दिबियापुर करने का सुझाव दिया इसके साथ ही कई और सुझाव भी सांसदों के द्वारा जनहित में दिये गये। बताते है कि उक्त सुझाव मानकर दोनों स्टेशनों के नाम बदल दिये गये जो इस बात का प्रतीक है कि हम अपने आजादी में भूमिका निभाने वाले महापुरूषों आदि के नाम पर प्रमुख स्थानों सड़कों और जिलों के नाम रख रहे हैं।
ऐसे में संविधान के तहत सभी को न्याय देने और उनकी सुरक्षा करने में सक्षम न्यायालय जिला प्रशासन और पुलिस जिस कम्पाउंड में बैठतीं है उसी में अंग्रेजों के समय से चले आ रहे एलेक्जेंडर एथलेटिंक्स क्लब का नाम बदलने के मामले में आज कुछ सदस्यों द्वारा चर्चा करते हुए कहा गया कि इसके सामने ही मेरठ कॉलेज है एक तरफ मंडलायुक्त कार्यालय बना हुआ है और सामने चौधरी चरण सिंह पार्क और निकट ही संविधान रचियता भारत रत्न डा. भीमराव अम्बेडकर जी की प्रतिमा स्थापित है पूरे जनपद से लोग यहां आकर धरना प्रदर्शन करने के साथ ही अफसरों को ज्ञापन आदि देते है। आसपास रहने वाले अधिकारियों वैसे भी ज्यादातर ने अब कलेक्ट्रेट के बजाय जिलाधिकारी और कई अफसरों ने एडीएम के बजाये अपर जिलाधिकारी जैसे हिन्दी नाम रखने शुरू कर दिये हैं।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर यूपी के माननीय सीएम योगी आदित्यनाथ जी भी स्वदेशी को बढ़ावा दे रहे हैं। दिल्ली और लखनऊ के बड़े कार्यालयों के नामों में परिवर्तन करने की चर्चा है ऐसे में वर्तमान समय में जनपद मेरठ का दिल कहे जाने वाले मंडलायुक्त चौराहे पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी की प्रतिमा के सामने स्थित एलेक्जेंडर एथलेटिक्स क्लब का नाम बदलकर जाने माने हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद एथलेटिक्स क्लब रखने का सुझाव देते हुए कहना है कि कोई भी नाम रखा जाये मगर किसी भारतीय का हो और खेल से संबंध बढ़ावा देने वाले किसी महापुरूष के नाम पर एलेक्जेंडर एथलेटिक्स क्लब का नाम हो तो अच्छा है लगभग 4 दशक पूर्व अंग्रेजी के लगे बोर्ड और इसके विरूद्ध सडकों पर प्रदर्शन करने और बोर्ड तोड़ने वाले उत्साही नेताओं में शुमार राज्यसभा सदस्य भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और कैंट विधायक अमित अग्रवाल सहित बागपत से सांसद डा. राजकुमार सांगवान आदि एलेक्जेंडर एथलेटिक्स क्लब का नाम बदलवाने और किसी भारतीय महापुरूष खिलाड़ी के नाम पर रखे जाने की मांग करें ऐसा कितने ही देशभक्त और स्वदेशी को बढ़ावा देने वाले नागरिकों का इन नेताओं से आग्रह है और वैसे भी यह कोई किसी जाती से संबंध संस्था या धार्मिक स्थान तो है नहीं जिसका नाम ना बदला जा सके। पीएम और सीएम साहब ही स्वदेशी को बढ़ावा देने महापुरूषों के नाम पर जिलों और स्टेशनों का नाम रखे जाने की बात को ध्यान में रखकर डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कैंट विधायक अमित अग्रवाल आदि को इस संदर्भ में बैठकों में अपने सुझाव रख एलेक्जेंडर एथलेटिक्स क्लब का नाम परिवर्तित कराया जाना चाहिए।
क्योंकि यहां से कुछ ही दूर महान स्वतंत्रता सेनानाी चंद्रशेखर की प्रतिमा लगी हुई है और थोड़ी दूर चलने पर संघ का कार्यालय स्थापित है कहने का आशय सिर्फ इतना है कि जब एलेक्जेंडर एथलेटिक्स क्लब से एक किमी के क्षेत्र मंें अपने भारतीय महापुरूष स्वतंत्रता सेना और देशभक्तों के साथ ही न्याय और सुरक्षा देने वाले बैठते हैं ऐसी भी जगह एलेक्जेंडर नाम जो नाम लेते हुए भी अंग्रेजी शासन का ध्यान दिलाता है और उनके द्वारा हमारे पूर्वजों के किये गये उत्पीड़न को ध्यान में रखते हुए हर हाल में बदला जाये एलेक्जेंडर नाम वर्तमान क्लब की चुनी हुई कार्यकारिणी चाहे तो प्रस्ताव पास कर जिला प्रशासन नगर निगम और आवश्यकता पड़े तो सरकार से नाम बदलने का आग्रह कर सकती है।
कितना ही अच्छा हो कि वर्तमान कार्यकारिणी के समय में क्लब का नाम किसी खिलाड़ी या महापुरूष के नाम पर रखा जाये और उसके पदाधिकारी होने का गौरव इस कार्यकारिणी को मिल सके।
(संकलन प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)
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