लखनऊ 09 जुलाई। अलीगंज सेक्टर-डी में 22 जून को अवैध बिल्डिंग में हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की मौत के बाद सरकार कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अग्निकांड की जांच कर रहे दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआइटी) को नौ आइएएस और इतने ही पीसीएस अधिकारियों के नाम भेजे हैं जो इसके लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। ये सभी अधिकारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में तैनात रहे हैं, कुछ अभी भी पदस्थ हैं जबकि तीन सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि एसआइटी इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर सकती है। अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआइटी को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।
जिन आइएएस अधिकारियों के नाम एसआइटी को भेजे गए हैं उनमें लखनऊ के मौजूदा नगर आयुक्त गौरव कुमार के अलावा मैनपुरी के डीएम इंद्रमणि त्रिपाठी, बहराइच के डीएम अक्षय त्रिपाठी, मीरजापुर के डीएम पवन गंगवार और बलिया के डीएम एमपी सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा रितु सुहास स्थानीय निकाय में अपर निदेशक हैं। तीन आइएएस अधिकारी शिवाकांत द्विवेदी, श्रीश चंद्र वर्मा और सत्येंद्र यादव रिटायर हो चुके हैं। 2016 में नोटिस के बावजूद आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जाती रहीं और एलडीए के अफसर आंखें मूंदे रहे। एलडीए ने आइएएस के अलावा जिन जिन पीसीएस अधिकारियों के नाम भेजे हैं उनमें अमित राठौर विपिन शिवहरे, श्रद्धा चौधरी, प्रिया सिंह, संगीता राघव, प्रभाकर सिंह, डीके सिंह, विश्व भूषण मिश्र और सुशील प्रताप सिंह हैं। यह सभी एलडीए में अलग-अलग समय पर तैनात रहे हैं।
इसके अलावा 14 अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता व 52 अवर अभियंताओं की सूची भी भेजी गई है। ऐसे ही प्राधिकरण सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों में उप सचिव माधवेश कुमार, रविनंदन सिंह, राजीव कुमार व स्थानीय निकाय सेवा के उप सचिव अतुल कृष्ण सिंह का नाम भी एसआइटी की सूची में है।
अलीगंज सेक्टर डी स्थित भूखंड संख्या एमएस 102 पर बने अवैध भवन में गेमिंग जोन व अन्य दफ्तर चल रहे थे जहां पर आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई थी नौ घायल हुए थे। शासन ने अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन प्रवीण कुमार की दो सदस्यीय एसआइटी बनाकर सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी। अब तक आरोपित भवन स्वामी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल व तीन अन्य को जेल भेजा जा चुका है, उसका भाई सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल फरार है।
एसआइटी ने एलडीए से मांगी थी सूची
एसआइटी ने एलडीए से 2016 से 2024 तक जोन चार व पांच में तैनात रहे प्रवर्तन व जोनल अधिकारियों की सूची मांगी थी। खासकर अग्निकांड वाले आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक निर्माण के दौरान एलडीए में तैनात अफसरों को घटना के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। यही वजह है कि एलडीए ने 100 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम एसआइटी को भेजे हैं। इनमें उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव व जोनल अधिकारी के रूप में कार्यरत रहने वालों के अलावा प्राधिकरण सेवा के अफसरों का नाम भी भेजा गया है।

