कानपुर 08 जुलाई। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित जाजमऊ के पुराने गंगा पुल से सफर करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर है. इस पुल की मरम्मत के दूसरे चरण के काम के लिए इसे करीब चार महीने तक पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा. पुल के निचले हिस्से का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है, लेकिन अब इसके ऊपरी हिस्से की मरम्मत और बेहद महत्वपूर्ण 28 बेयरिंग को बदलने का काम शुरू होना है. हालांकि, ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर मोड़ने यानी डायवर्जन की कोई ठोस योजना तय न होने के कारण नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) अभी इसे बंद नहीं कर पा रहा है. अधिकारी लगातार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि बिना जाम लगाए इस बड़े काम को कैसे अंजाम दिया जाए.
इस ओवरब्रिज के बंद होने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी लखनऊ से कानपुर की तरफ आने वाले वाहनों को होगी. जिला प्रशासन और पुलिस सरैंया क्रॉसिंग के रास्ते ट्रैफिक को डायवर्ट करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है. लेकिन समस्या यह है कि वहां सेतु निगम का रेलवे ओवरब्रिज अभी आधा-अधूरा बना हुआ है. इस रूट पर कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग होने की वजह से रेलवे फाटक हर आधे घंटे में 10 से 15 मिनट के लिए बंद हो जाता है. ऐसे में अगर मुख्य हाईवे का पूरा ट्रैफिक इस तरफ मोड़ा गया, तो वहां चौबीसों घंटे भारी जाम की स्थिति पैदा हो जाएगी.
कानपुर और लखनऊ के बीच रोजाना सैकड़ों भारी कमर्शियल वाहन और ट्रक चलते हैं, जिनके लिए फिलहाल कोई प्रभावी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है. उन्नाव के बक्सर गंगा पुल और रायबरेली के लालगंज स्थित गेगासो गंगा पुल पर पहले से ही भारी वाहनों के चलने पर पूरी तरह रोक लगी हुई है. ऐसे में बड़े ट्रकों और बसों को निकालने के लिए अधिकारियों को कोई सुरक्षित रास्ता नहीं सूझ रहा है. एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव का कहना है कि प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर जल्द ही एक व्यावहारिक रूट तय किया जाएगा, जिसके बाद ही पुल को बंद किया जाएगा.
एनएचएआई के इंजीनियरों के मुताबिक इस 700 मीटर लंबे पुल की मरम्मत का काम बेहद जटिल है. पुल के प्रत्येक गर्डर को बड़े जैक की मदद से ऊपर उठाया जाएगा और फिर पुरानी बेयरिंग को निकालकर नई बेयरिंग लगाई जाएगी. इसके बाद माइक्रो कंक्रीट और विशेष सामग्री भरकर पुल के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाया जाएगा. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कंक्रीट को पक्का करने के लिए लगातार 28 दिनों तक क्योरिंग यानी पानी से तराई करनी होगी. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुल पर किसी भी तरह के वाहन का चलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए इसे पूरी तरह बंद रखना जरूरी है.
पिछले कुछ समय से जाजमऊ के इस पुराने पुल पर चलने के दौरान तेज कंपन यानी हिलने की समस्या सामने आ रही थी. इसके बाद सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) की टीम ने पुल की जांच की थी और अपनी रिपोर्ट में तुरंत मरम्मत कराने की सिफारिश की थी. विशेषज्ञों की हरी झंडी मिलने के बाद ही एनएचएआई ने इस पर काम शुरू किया है. पुल के निचले हिस्से में ग्राउटिंग, कोटिंग और जंग से बचाने वाले विशेष एंटी-कोरोजन पेंट का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है, ताकि पुल की उम्र को कई साल और बढ़ाया जा सके.

