लखनऊ दिल्ली सहित देश में कई जगह आग लगने और बरसात का पानी भरने के चलते चल रहे कोचिंग सेंटरों में जो हुआ वो हृदयविदारक और कितने ही परिवारों को जीवनभर का दुख सहने का कारण बन गया। जैसा कि हमेशा होता है जब भी कोई बड़ी घटना होती है तो सभी जिलों में कोचिंग सेंटरों की जांच का काम शुरु हो जाता है। बड़े अधिकारी इस काम में लगते हैं और निरीक्षण में कोई पंजीकरण कराकर नियमानुसार सेंटर चला रहा हो वो ही बच पाता है वरना बडे कोचिंग सेंटर नियमों पर खरे नहीं उतरते और चेतावनी के बाद भी यह ना पंजीकरण कराते हैं ना ऐसी जगहों पर अपने सेंटर ले जाते हैं जहां नियमों का पालन हो सके। कुछ कोंचिंग सेंटर दिन में कई बार जाम का कारण बनते हैं। इस बार लखनऊ की घटना के बाद पहली बार सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा अपनाए गए सख्त रुख के चलते लगभग डेढ़ दर्जन इंजीनियर कई पीसीएस सहित एक दो आईएएस के खिलाफ कार्रवाई होने की बात सामने आई है। तथा हर जिले में नियम विरुद्ध चल रहे कोचिंग सेंटर सील कर बंद कराया जा रहा है।
यह बात सही है कि सभी कोचिंग सेंटरों में ऐसी घटना नहीं घटी लेकिन कब कहां क्या हो जाए इस बारे में कोई विश्वास से नहीं कह सकता। किसी को नहीं पता था कि दिल्ली के कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से बच्चों की मौत होगी या लखनऊ जैसी घटना होगी। इसे ध्यान में रखते हुए कोचिंग सेंटर संचालक अपनी स्थिति में सुधार करने और नियमानुसार कोचिंग चलाने का शपथ पत्र देने की बजाय आंदोलन और ज्ञापन देकर कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है लेकिन नागरिकों का यह कथन सही है कि शासन प्रशासन को अब कमजोर नहीं पड़ना चाहिए चाहिए कोचिंग सेंटर अलख पांडे का हो या खान सर जैसे नामचीन व्यक्तियों का। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। और जब तक वह नियमानुसार सेंटर नहीं चलाते तब तक उन पर प्रतिबंध रहे क्योंकि इनकी कमियों के कारण घटना में छात्र मारे जाते हैँ और पुलिस प्रशासन को व्यवस्था बनाने में जनशक्ति खर्च करनी पड़ती है। जब कोई समस्या हो तो सरकार उसे भुगते और माल कोई और कमाए ऐसा क्यों। एक सज्जन का यह कहना सही लगा कि जो कार्रवाई कोचिंग सेंटरों पर हो रही है वो जारी रहे और जिन इमारतों में यह चल रहे हैं उनके लिए दोषी विभागों के अधिकारियों पर कार्रवाई हो और उच्च शिक्षा विभाग के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित फायर, नगर निगम आवास विकास, विकास प्राधिकरण के अफसरों पर कार्रवाई हो इनके बनने के समय तैनात रहे इंजीनियरों व अफसरों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसा ज्यादातर नागरिक सोचते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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