मेरठ 02 जुलाई (प्र)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं और हर साल हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले शिव भक्त कांवड़ियों की सुविधा के लिए प्रस्तावित 111 किलोमीटर लंबी गंगनहर पटरी कांवड़ मार्ग का निर्माण कार्य पिछले करीब एक वर्ष से पूरी तरह ठप पड़ा है। वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान करते हुए इसके लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की धनराशि भी जारी की थी, लेकिन अब यह परियोजना पर्यावरणीय मंजूरियों और विभागीय प्रक्रियाओं में उलझकर रह गई है। इस बीच परियोजना की लागत बढ़कर 627 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। शासन ने इसका बजट भी रिवाइज कर दिया है। यह सड़क मुरादनगर से लेकर मुजफ्फरनगर के उस अंतिम छोर तक बनाई जानी है, जो हरिद्वार की सीमा से जुड़ता है। परियोजना का जिम्मा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की मेरठ यूनिट को सौंपा गया था।
परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद शुरुआती स्तर पर कुछ निर्माण कार्य और सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई थी। मशीनें भी मौके पर पहुंचीं और विभाग ने निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी थीं, लेकिन कुछसमय बाद काम अचानक बंद हो गया। इसके पीछे मुख्य वजह पर्यावरणीय मंजूरियों और पेड़ों की कटाई को लेकर उठे विवाद को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की आवश्यकता पड़ रही थी। इसी मामले को लेकर पर्यावरण से जुड़े पक्षों ने आपत्ति जताई और मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच गया। एनजीटी ने पेड़ों की कटाई पर आपत्ति जताते हुए मामले का संज्ञान लिया और बिना आवश्यक अनुमति के पेड़ काटने पर रोक लगा दी। इसके बाद परियोजना की गति पूरी तरह थम गई।
वन विभाग की एनओसी बनी बड़ी बाधा
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) आवश्यक है। वर्तमान में वन विभाग इस एनओसी की प्रक्रिया में जुटा हुआ है, लेकिन अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पर्यावरणीय प्रभाव, पेड़ों की संख्या और वैकल्पिक पौधारोपण की योजना को लेकर कई स्तरों पर विचार विमर्श चल रहा है। इस मामले में आगामी 28 जुलाई को सुनवाई की तिथि भी निर्धारित बताई जा रही है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लागत में तीन गुना से अधिक वृद्धि
जब इस परियोजना को मंजूरी मिली थी. तब इसकी अनुमानित लागत करीब 200 करोड़ रुपये थी. लेकिन रुकने, निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी और संशोधित प्रस्ताव तैयार होने के बाद अब इसकी लागत बढ़कर 627 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यानी एक साल के भीतर ही परियोजना की लागत में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजना इसी तरह लंबित रही तो आने वाले समय में इसकी लागत और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा।
कांवड़ यात्रा के लिए महत्वपूर्ण है योजना
हर साल सावन के महीने में लाखों कांवड़िये हरिद्वार से गंगाजल लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों के लिए रवाना होते हैं। इस दौरान मेरठ, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के राष्ट्रीय राजमागों पर भारी भीड़ और यातायात का दबाव देखने को मिलता है। गंगनहर पटरी मार्ग को विकसित करने का उद्देश्य कांवड़ियों को एक समर्पित और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना था, जिससे हाईवे पर यातायात का दबाव कम हो और दुर्घटनाओं की संभावना भी घटे। सात मीटर चौड़ी सड़क बनने के बाद कांवड़ यात्रा को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी।
स्थानीय लोगों में बढ़ रही नाराजगी
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना होने के बावजूद एक साल से काम बंद पड़ा है। बड़ी तादाद में पेड़ भी काट दिये गए हैं, फिर भी निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है। जगह-जगह अधूरे निर्माण और अधूरी तैयारियां इस परियोजना की धीमी रफ्तार की गवाही दे रही है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि समय रहते पर्यावरणीय मंजूरियों और विभागीय अड़चनों को दूर नहीं किया गया, तो यह परियोजना भी अन्य लंबित योजनाओं की तरह वर्षों तक फाइलों में सिमट कर रह जाएगी।
विधायक ने किया था पेड़ काटने का विरोध
गंगनहर पटरी मार्ग का मामला एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती को सामने लेकर आया है। सरधना के सपा विधायक अतुल प्रधान ने इसका पुरजोर विरोध किया था। पेड़ काटने का मुद्दा उन्होंने उठाया था। कहा था कि वन विभाग ने ज्यादा पेड़ काट दिये हैं, जो गलत है। इसको लेकर उन्होंने विरोध भी जताया था, तभी से निर्माण कार्य पेंडिंग पड़ा है। अब सबकी निगाहें वन विभाग की एनओसी और एनजीटी में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
एनओसी का इंतजारर: एक्सईएन
एक्सईएन पीडब्ल्यूडी संजय बताया कि एनजीटी में ये मामला चल रहा है। वहीं से को इसकी एनओसी मिल जाएगी, तभी पेड़ काटे जाएंगे। इसके बाद ही सड़क निर्माण का कार्य आरंभ किया जा सकता है। फिलहाल काम रुका हुआ है।

