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    Home»देश»नवजात शिशु की सांस की बंद नलियों का किया सफल ऑपरेशन
    देश

    नवजात शिशु की सांस की बंद नलियों का किया सफल ऑपरेशन

    adminBy adminJuly 2, 2026No Comments3 Views
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    मेरठ 02 जुलाई (प्र)। जन्म होते ही शिशु को सांस लेने में दिकत, दूध नहीं पीने के साथ उसका रंग कभी नीला तो कभी लाल होता देख मवाना का एक पूरा परिवार में कोहराम मच गया। आनन-फानन में शिशु को नियोनेटोलॉजिस्ट एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय को दिखाया तो पता चला कि शिशु को कोएनल एट्रेसिया की बीमारी है, यानी उसके नाक से सांस लेने की दोनों नालियां बंद है। शिशु की हर पल जान को खतरा के बारे में परिवार को बताया गया और बेहद जटिल आपरेशन कराने की सलाह दी गई। इस शिशु का डा. अमित उपाध्याय व बाल रोग विशेषज्ञ प्रियंका गुप्ता की देखरेख में ईएनटी एवं हेड-नेक सर्जन डॉ. सुमित उपाध्याय, ईएनटी सर्जन डा. रेनू उपाध्याय ने आपरेशन किया। अब शिशु नाक से सांस लेने लगा है और दूध भी पी रहा है। अब पूरा परिवार खुश है।

    बुधवार को न्यूट्रिमा अस्पताल में पत्रकारों से बातचीत में बाल रोग विशेषज्ञ डा. अमित उपाध्याय ने बताया कि दुर्लभ जन्मजात बीमारी कोएल एड्रेसिया यानी सांस की नालियां बंद होने की बीमारी सात आठ हजार बच्चों में एक शिशु को होती है। पूरी तरह सांस न मिलने पर शिशु की मौत भी हो सकती है। इसका आपरेशन बेहद जटिल है और बड़े अस्पताल में ही संभव है, जो यहां न्यूटीमा अस्पताल में उपलब्ध है। ईएनटी सर्जन डा. सुमित उपाध्याय ने बताया कि इस शिशु का एंडोस्कोपिक ऑपरेशन किया गया। उनके साथ अस्पताल की नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ टीम रही। ऑपरेशन से पूर्व व ऑपरेशन के बाद शिशु की संपूर्ण देखभाल डॉ. अमित उपाध्याय के मार्गदर्शन में न्यूट्रिमा अस्पताल की विशेष नियोनेटल टीम द्वारा की गई। विशेषज्ञ निगरानी, सतत मॉनिटरिंग और समुचित उपचार के कारण मरीज का ऑपरेशन एवं रिकवरी दोनों सफल रहे।

    डॉ. सुमित उपाध्याय ने कहा कि कोएनल एट्रेसिया एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और विशेषज्ञ उपचार से मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक और अनुभवी टीम के सहयोग से हम इस जटिल बीमारी का सफल उपचार कर रहे हैं। वह पांच शिशुओं के सफल आपरेशन कर चुके हैं। डॉ. अमित उपाध्याय, नियोनेटोलॉजिस्ट एवं शिशु रोग विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे नवजात एवं छोटे बच्चों में ऑपरेशन जितना महत्वपूर्ण होता है, उतनी ही महत्वपूर्ण ऑपरेशन से पहले और बाद की गहन चिकित्सा देखभाल होती है।

    न्यूट्रिया अस्पताल की विशेष नियोनेटल टीम द्वारा मरीज की निरंतर निगरानी, श्वसन प्रबंधन, समुचित उपचार सुनिश्चित किया, जिससे मरीज का स्वास्थ्य तेजी से बेहतर हुआ। बाल रोग विशेषज्ञ डा. प्रियंका गुप्ता का कहना है कि अब शिशु माता पिता के पास है, लेकिन इस शिशु की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। माता पिता को देखभाल के बारे में ट्रेनिंग दी गई। इस शिशु के माता पिता दोनों सफल आपरेशन के बाद खुश नजर आए। उनका कहना है कि अब बच्चा आराम से सांस ले रहा है, उसका रंग नीला नहीं हो रहा दूध भी आराम से पी रहा है।

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