मुंबई 01 जुलाई। सचिन अहीर बुधवार को बिना किसी विरोध के महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति चुने गए हैं. सदन ने आज की कार्यवाही के दौरान उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी. इससे एक सप्ताह पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के छह बागी लोकसभा सदस्य एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे.
इससे पहले, महाविकास अघाड़ी (MVA) द्वारा मूल रूप से समर्थित पद के लिए जगन्नाथ अभ्यंकर द्वारा दाखिल नामांकन को विपक्षी नेताओं ने वापस ले लिया था. उनकी उम्मीदवारी को पहले तीन सदस्यों ने प्रस्तावित और समर्थन किया था. शुरुआत में, उपसभापति पद के लिए चार नामांकन दाखिल किए गए थे.
इनमें से, जे एम अभ्यंकर का प्रस्ताव मंत्री चंद्रकांत पाटिल के कहने पर वापस ले लिया गया. सचिन मोहन अहीर को नामांकित करने के लिए अलग-अलग प्रस्ताव संजय खाड़े, प्रवीण दारकेकर और डॉ. मनीषा कायंडे ने पेश किए, जिनका विक्रम काले, धैर्यशील कदम और रवींद्र फाटक ने समर्थन किया.
इसके बाद की प्रक्रिया के बाद, सचिन अहीर का उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) के तौर पर चुनाव बिना किसी विरोध के घोषित किया गया. उपसभापति का पद विधान परिषद में एक अहम संवैधानिक पद माना जाता है. मुख्य जिम्मेदारियों में सभापति की गैरमौजूदगी में सदन की कार्यवाही चलाना, बहस का संचालन करना, नियमों के मुताबिक सुचारू रूप से काम करना और सदस्यों को बोलने का मौका देना शामिल है.
सचिन अहीर हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की नेतृत्व वाली शिवसेना में अनौपचारिक तौर पर शामिल हुए थे, जिसके बाद उन्हें उपसभापति पद के लिए नामांकित किया गया था. विधान परिषदमें महायुति गठबंधन की स्पष्ट बहुमत को देखते हुए उनके चुनाव का काफी इंतजार था.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सचिन अहीर के विधान परिषद के उपसभापति के तौर पर बिना किसी विरोध के चुने जाने पर सदन और विपक्ष का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा, “सदन की ऊंची परंपराओं को बनाए रखते हुए, विपक्ष ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे सचिन अहीर बिना किसी विरोध के उपसभापति चुने गए.”

