कानपुर 01 जुलाई। शहर के चर्चित किडनी कांड में अब कमिश्नरेट पुलिस की ओर से 14 आरोपियों के खिलाफ 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी गई है. चार्जशीट में पुलिस ने माना, सभी आरोपी संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे. वह जरूरतमंद लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और उनकी किडनी बेचकर करोड़ों रुपये कमाते थे. इनमें से कई आरोपी ऐसे हैं, जो मौजूदा समय में जेल के अंदर हैं. केवल 25 हजार के ईनामी अफजाल को अग्रिम जमानत मिल चुकी है.
वहीं, अब इस गंभीर मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है. बाकायदा मुकदमा दर्ज करके आरोपियों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है. चर्चा ये भी है, कमिश्नरेट की ओर से इस मामले में आरोपियों के खिलाफ गैंग्स्टर की कार्रवाई भी हो सकती है. पुलिस की चार्जशीट में जहां किडनी ट्रांसप्लांट किया व मरीजों को रखा गया, वहां के सीसीटीवी फुटेज, होटल के रजिस्टर, वाट्सएप चैट को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है.
किडनी कांड की शुरुआत शहर में आहूजा अस्पताल से हुई थी. पुलिस को सबसे पहले इसी अस्पताल के सारे साक्ष्य मिले थे. यहां मुजफ्फरनगर निवासी पारूल तोमर का 29 मार्च को किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था. पारुल को बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष चौधरी ने किडनी बेची थी. इस मामले में जब खुलासा हुआ था, तो अस्पताल संचालक डा.प्रीति आहूजा, उनके पति डा.सुरजीत आहूजा, आरोही अस्पताल के संचालक राजेश, मेडलाइफ के संचालक रामप्रकाश, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह, बिचौलिए शिवम अग्रवाल को जेल भेजा गया था. शिवम से पूछताछ के बाद साक्ष्यों के साथ गाजियाबाद के ओटी मैनेजर राजेश, हापुड़ निवासी ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह राघव, बागपत निवासी परवेज सैफी, गाजियाबाद निवासी रोहित तिवारी, उसके साथी सैफुद्दीन व अखिलेश तिवारी को पकड़ा गया था. इन सभी को जेल भेजा जा चुका है. डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि इस मामले में एसीएमओ, 11 डॉक्टर्स व 20 पुलिसकर्मियों समेत 40 गवाह बनाए गए हैं.

