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    Home»देश»जनता का पैसा लोन के रूप में देकर उसे वसूलने की असरदार कोशिश न करना मंजूर नहीं : सुप्रीम कोर्ट
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    जनता का पैसा लोन के रूप में देकर उसे वसूलने की असरदार कोशिश न करना मंजूर नहीं : सुप्रीम कोर्ट

    adminBy adminJune 20, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 20 जून (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बैंकों, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (एआरसी) और कर्ज लेने वालों के बीच गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करते हुए कहा कि करदाताओं का पैसा लोन के तौर पर दिया जाए और फिर उसे वसूलने के लिए कोई असरदार कोशिश न की जाए, यह मंजूर नहीं है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उसे सिर्फ सार्वजनिक धन के गलत इस्तेमाल की चिंता है, जिसे लोगों की भलाई के लिए खर्च किया जाना चाहिए था।शीर्ष अदालत ने एक याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
    इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का 1537 करोड़ रुपये का कर्ज दो एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों के जरिये सिर्फ 73.50 करोड़ रुपये में सेटल कर दिया गया। वकील अश्विनी कुमार दुबे के जरिये दायर याचिका में एआरसी, सरकारी बैंकों और नोएडा की एक इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़ी कथित बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच की मांग की गई है।
    पीठ ने कहा कि कर्ज लेने वालों, एआरसी और बैंकों के बीच गहरी मिलीभगत है। शीर्ष अदालत ने माना कि वह बैंकों के व्यावसायिक फैसलों में दखल देने की सीमाओं से अवगत है। लेकिन, कहा कि अगर आपकी व्यावसायिक समझ यही है कि आप करदाताओं और जनता का पैसा इकट्ठा करें, उसे लापरवाही से जारी करें और लोन दें और फिर उसे वसूलने की कोई कोशिश न करें, तो इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
    याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि भारी मात्रा में ऋण राशि छूट पर हस्तांतरित की जा रही है, जिससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान हो रहा है। यह कोई अकेला मामला नहीं है। यह तो बस समस्या का एक छोटा सा हिस्सा है। याचिकाकर्ता बैंकों, एआरसी और कर्ज लेने वालों के बीच की इस मिलीभगत की जांच की मांग कर रहे हैं। पीठ ने भी कहा कि एआरसी के कामकाज की जांच करना बहुत जरूरी है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तारीख तय की।

    Court Order Desh Failure to make effective efforts to recover public money lent out is unacceptable: Supreme Court. New Delhi tazza khabar tazza khabar in hindi
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