नई दिल्ली 09 जून। फीफा विश्व कप 2026 में फुटबॉल के खिलाड़ी घास के जिस मैदान पर दौड़ेंगे, वह कोई सामान्य घास नहीं होगी। यह घास विज्ञान का ऐसा अजूबा है, जिसे वैज्ञानिकों ने पांच साल की मेहनत से प्लास्टिक पर उगाया है। इसे बेडरोल की तरह लपेटकर पिज्जा डिलीवरी की तरह रेफ्रिजरेटेड ट्रकों से 16 स्टेडियमों तक पहुंचाया गया।
11 जून को मैक्सिको सिटी के एस्तादियो अजटेका स्टेडियम में पहली सीटी के साथ फुटबॉल महाकुंभ शुरू हो जाएगा। इसके लिए चुने गए मैदानों की तैयारी करीब पांच साल पहले शुरू हुई थी। फीफा ने टेनेसी यूनिवर्सिटी और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के ‘टर्फग्रास’ विशेषज्ञों के साथ साझेदारी की। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के टर्फ विशेषज्ञ जॉन रोजर्स बताते हैं कि घास की ज्यादा किस्मों से मैदान की एकरूपता नहीं बनेगी। उन्होंने बताया कि गर्म इलाकों के लिए बरमूडा और ठंडी जगहों के लिए केंटकी ब्लूग्रास और पेरेनियल राईग्रास का उपयोग किया गया।
मिट्टी नहीं प्लास्टिक पर उगाया
इस घास को मिट्टी पर नहीं बल्कि प्लास्टिक की सतह पर उगाया गया। मिट्टी में जड़े गहराई तक चली जाती हैं। ऐसे में स्टेडियम ले जाने के लिए घास काटते वक्त जड़ें भी कट जाती हैं। प्लास्टिक पर उगाई गई घास की जड़ें नीचे जाने के बजाय किनारों में फैलकर चटाई जैसी परत बना लेती हैं। इससे घास को बिना नुकसान पहुंचाए ‘रोल’ में समेटकर स्टेडियम पहुंचाया जा सकता है।
बिछाने से पहले तैयारी
जब घास स्टेडियम में पहुंचती है तो उसे केवल कालीन की तरह बिछा नहीं दिया जाता। पहले पूरी सतह तैयार की जाती। कुछ स्टेडियमों में पुरानी कृत्रिम घास हटाई गई और कंक्रीट के ऊपर नई खेल सतह बनाई गई। कुछ जगहों पर मौजूदा सतह को सुरक्षित रखते हुए उसके ऊपर उगाए गए घास की नई परतें बिछाई गईं।
वैज्ञानिक जॉन सोरोचन के अनुसार यह केवल घास उगाने का काम नहीं था, बल्कि 16 स्टेडियमों के लिए एक जैसी खेल सतह तैयार करने की चुनौती थी। इस घास को बड़े-बड़े टुकड़ों में काटकर ‘रोल’ बनाया गया, जैसे पिज्जा के टुकड़े करते हैं, फिर उन्हें रेफ्रिजरेटेड ट्रकों में पहुंचाया गया।

