नई दिल्ली 01 जून। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियम 2023 में संशोधन का प्रस्ताव किया है। प्रस्ताव के अनुसार एमबीबीएस छात्रों को अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप सहित पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अधिकतम 10 वर्ष का समय मिलेगा। एनएमसी ने वेबसाइट पर अपलोड किए गए मसौदा संशोधन में हितधारकों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।
उत्तीर्ण करने को अधिकतम चार प्रयास ही मिलेंगे
प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार प्रथम व्यावसायिक एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए छात्रों को अधिकतम चार प्रयास ही मिलेंगे। यह प्रावधान पहले की तरह रहेगा। यह प्रावधान एनएमसी के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट (एफएमजीएल) विनियम, 2021 के अनुरूप है। आयोग की ओर से 18 मई को जारी मसौदा संशोधन में कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में छात्र को प्रथम वर्ष परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए चार से अधिक प्रयासों की अनुमति नहीं होगी और कोई भी छात्र एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश की तिथि से 10 साल के बाद स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम जारी नहीं रख सकेगा। जून 2023 में एनएमसी ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की अधिकतम अवधि 10 वर्ष से घटाकर नौ वर्ष कर दी थी। नया प्रस्ताव लागू होने के बाद 2023 से पहले लागू समयसीमा प्रभावी रूप से बहाल हो जाएगी।
भले ही एनएमसी ने कुल कोर्स की अवधि को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन एमबीबीएस फर्स्ट ईयर को पास करने के नियमों में रत्ती भर भी ढील नहीं दी गई है. नए ड्राफ्ट में साफ लिखा है कि छात्रों को फर्स्ट ईयर की परीक्षा क्लियर करने के लिए अधिकतम केवल 4 मौके ही मिलेंगे. अगर कोई स्टूडेंट इन 4 प्रयासों में भी फर्स्ट ईयर पास नहीं कर पाता है तो उसका मेडिकल कॉलेज से दाखिला हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा. 10 साल का फायदा उठाने के लिए भी पहले साल की ‘लक्ष्मण रेखा’ को पार करना अनिवार्य होगा.
नए संशोधन में एनएमसी ने बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है. कई बार एमबीबीएस के स्टूडेंट्स मान लेते हैं कि यह समय सीमा काउंसलिंग या मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की तारीख से गिनी जाती है. लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार, यह 10 साल की समय सीमा उस दिन से गिनी जाएगी, जिस दिन छात्र आधिकारिक तौर पर ‘फर्स्ट एमबीबीएस’ पाठ्यक्रम की कक्षाओं में शामिल या जॉइन होता है. उसी दिन से मेडिकल स्टूडेंट का रिवर्स काउंटडाउन शुरू हो जाएगा.
एनएमसी ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को पब्लिक डोमेन में रखकर सभी मेडिकल कॉलेजों, प्रिंसिपल्स, स्टूडेंट्स और अभिभावकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. इस प्रस्ताव पर फीडबैक देने के लिए 30 दिनों (1 महीना) का समय यानी 27 जून 2026 तक की तारीख तय की गई है. इस अवधि के दौरान प्राप्त होने वाले सुझावों की समीक्षा करने के बाद ही इस 10 साल वाले नियम को अंतिम रूप देकर पूरे देश में कानूनी रूप से लागू किया जाएगा.

