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    Home»देश»सतीश शर्मा के साथ ही रिश्वत देने की कोशिश करने वाले ठेकेदार की भी हो जांच, पूर्व में इसका क्या इतिहास रहा है
    देश

    सतीश शर्मा के साथ ही रिश्वत देने की कोशिश करने वाले ठेकेदार की भी हो जांच, पूर्व में इसका क्या इतिहास रहा है

    adminBy adminMay 30, 2026No Comments51 Views
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    मेरठ, 30 मई (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। मैं किसी रिश्वतखोर या गलत काम करने वाले का समर्थन तो बिलकुल नहीं करता हूं लेकिन हमेशा यह सुना गया है कि जितना दोषी रिश्वत लेने वाला होता है उतना ही देने वाला भी होता है मगर क्या हो रहा है बिना जांचे परखे शिकायत पर रोज ही किसी ना किसी अफसर के पकड़े जाने की खबरें पढ़ने को खूब मिलती हैं और यह भी सही है कि कुछ वर्ष की कठिनाईयों के उपरांत ज्यादातर मामलों में रिश्वत लेने वाले बरी भी हो जाते हैं।

    वर्तमान में बात अगर हम कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डा. सतीश शर्मा के रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों की करे तो मेरा मानना है कि जिस व्यक्ति ने शिकायत की अब उसकी भी जांच होनी चाहिए कि आखिर कौन सा गलत काम था जिसे करने के लिए रिश्वत मांगी गयी और देने वाले का पूर्व इतिहास क्या है सीबीआई ने शिकायत मिलने पर अपना काम किया अच्छा है लेकिन हमे यह भी सोचना चाहिए कि एक ही झटके में बीते पांच दशक से राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले सतीश शर्मा आखिर एक दम ही भ्रष्ट कैसे हो गये इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि कहीं प्रायोजित तरीके से तो उन्हें नहीं फंसाया गया क्योंकि ऐसे किस्से आजकल हर प्रकार के फिल्मों सिरियलों और सामान्य रूप से भी देखने को मिलते हैं कि सामने वाले को अपनी बात मानने और काम करने के लिए मजबूर करने और ना करने पर प्रायोजित रूप से शिकायत कर उसे रिश्वत खोरी में फंसा देने के देखने को मिलते हैं। अभी एक सिरियल देख रहा था कि एक थाना प्रभारी से क्षेत्र के मंत्री नाराज हो गये तो उन्होंने अपने चापलूस से थानेदार पर रिश्वत का आरोप लगवाकर रूपयों से भरा बैग वहां छोड़ दिया जिस पर थानेदार जी जेल भी गये बाद में आरोप लगाने वाला खुद सामने आया और बोला मुझसे इन्होंने कभी रिश्वत नहीं मांगी थी और मैंने झूठा आरोप लगाया था मैं बैग धोखे से रखकर आया था।

    अब कोई कह रहा है डा. सतीश ने लगाया कैंट बोर्ड पर बदनुमा दाग, कुछ कह रहे है कैंट बोर्ड पर लम्बे समय से थी नजर भर्ती प्रक्रिया में धांधली नामीत सदस्य ने पार्किंग ठेका नवीनीकरण पर मांगी थी रिश्वत। एक हमारे काबिल भाई ने लिखा कि कैंट बोर्ड पर बदनुमा दाग लगाया मेरे भाई ऐसे मामले तो कैंट बोर्ड में पूर्व काफी होते रहते हैं कुछ अफसरों को छोड़कर जैसा कि खबरों में पढ़ने को मिलता है भ्रष्टाचार के आरोप तो आम नागरिक भी लगाते रहे हैं कोई सतीश शर्मा पहला व्यक्ति तो है नहीं जो बदनुमा दाग लगा दिया यहां तो सीबीई अपना काम करेगी।

    मुझे पाठकों की एक बात बड़ी सही लगती है कि अभी रिश्वत लेते हुए की बात सामने आई है किसी भी न्यायालय ने डा. सतीश शर्मा को अपराधी नहीं बताया है मामला चलने दो जब परिणाम आयेगा तो उसके हिसाब से पत्रकारिता कर ली जायेगी लेकिन फिलहाल यह कहना कि वह बदनुमा दाग लगा चुके हैं सही नहीं है। मेरा स्पष्ट मानना है और जागरूक नागरिकों के इस कथन से मैं भी सहमत हूं कि इस मामले की गोपनीयता से जांच करें सतीश शर्मा तो पकड़े जा चुके हैं लेकिन रिश्वत का आरोप लगाने वाले का भी वर्तमान और पूर्व गतिविधियों को भी खंगाला जाना चाहिए। क्योंकि कहीं ऐसा तो नहीं है कि सतीश शर्मा गलत ठेका छोड़ने का विरोध कर रहे हों इसलिए उन्हें फंसाया गया हो। मैं ना तो सतीश शर्मा को ईमानदारी का तमगा दे रहा हूं और ना ही आरोप लगाने वाले पर कोई गलत सोच नहीं है मगर क्योंकि सतीश शर्मा का बेदाग छवि रही है इस बात को और आरोप लगाने वाले ठेकेदार की गतिविधियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए क्योंकि यह समाज में अच्छी छवि के एक व्यक्ति के साथ घिनौनी साजिश भी हो सकती है। और अगर रिश्वत ली है तो सजा भी काटेंगे मैं या कोई और बचाने की स्थिति में तो हैं नहीं और ना ही किसी भ्रष्टाचार का समर्थन करते हैं। लेकिन अगर ग्रामीण कहावत रिश्वत लेने और देने वाले दोनों ही दोषी होते है लेकिन पहले इस प्रकरण की पूरी छानबीन हो क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर तो कोई भी अपना गलता काम कराने और ना करने पर प्रायोजित तरीके से किसी को भी फंसाता रहेगा और अगर सतीश शर्मा पर लगे झूठे आरोप साबित हुए तो फिर कोई सही काम करने को भी तैयार नहीं होगा और बाकी तो यह किंवदंती सही लगती है कि लंका में सभी 52 गज के हैं कोयले की कोठरी कोई भी बिना कालिख लगे बाहर नहीं निकल सकता।
    -आम आदमी की राय

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