लखनऊ 25 मई। परिवहन विभाग की ज्यादातर सेवाएं अब प्राइवेट हाथों में सौंपी जा रही हैं. अभी तक 15 साल पुराने वाहनों का नवीनीकरण आरटीओ कार्यालय में होता था, लेकिन अब इसे भी निजीकरण के हवाले कर दिया गया है. अब 15 साल बाद अगर वाहनों का रि रजिस्ट्रेशन कराना है तो आरटीओ के बजाय ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर जाना होगा. यहां पर वाहन का इंस्पेक्शन होगा, रिपोर्ट लगेगी और उसके बाद ही वाहन का नवीनीकरण हो पाएगा. अगर वाहन अनफिट पाया जाएगा तो स्क्रैप की श्रेणी में डाल दिया जाएगा.
उत्तर प्रदेश में 15 साल पुराने सरकारी वाहनों के लिए स्क्रैप नीति लागू है. जितने भी सरकारी विभागों में वाहन 15 साल की आयु पूरी कर चुके हैं, उन्हें दोबारा रजिस्टर्ड नहीं किया जा रहा है. प्रदेश भर में छह हजार से ज्यादा सरकारी वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है. अब केंद्र सरकार की तरफ से इस तरह का प्लान किया गया है. अब 15 साल के वाहनों के रि रजिस्ट्रेशन से पहले मशीनों पर तकनीकी जांच होगी. एटीएस के ग्रीन सिग्नल देने के बाद ही आरटीओ कार्यालय में वाहन का नवीनीकरण हो सकेगा.
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में जो व्यवस्था है इसके तहत 15 साल से ज्यादा आयु वाले वाहनों का आरटीओ कार्यालय में रि रजिस्ट्रेशन होता है. वाहन का इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाण पत्र होने के साथ ही टैक्स जमा होने पर फिर से रि रजिस्ट्रेशन कर लिया जाता है. इससे वाहन स्वामियों का वाहन पांच-पांच साल तक की अवधि के लिए वैध हो जाता है, लेकिन अब केंद्र सरकार ने आठ मई में को एक ऐसा आदेश जारी कर दिया है जिससे अब 15 साल की आयु पूरी कर चुके वाहनों को एटीएस पर फिटनेस टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा. फिटनेस में पास नहीं होने पर वाहन का नवीनीकरण नहीं होगा.
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने पहले सरकारी वाहनों को स्क्रैप करने की नीति बनाई. इसके तहत नियम लागू किया गया कि जिन सरकारी वाहनों की आयु 15 साल पूरी हो चुकी है उन्हें फिर से रजिस्टर्ड न कराया जाए. ऐसे सरकारी वाहन स्क्रैप कराए जाएं जिससे यह जहरीला धुआं और पर्यावरण को प्रदूषित न करें. सरकारी वाहनों पर तो यह नीति लागू हो गई और अब 15 साल पुराने वाहन री रजिस्टर्ड नहीं हो रहे हैं, लेकिन लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अब भी लाखों की संख्या में ऐसे प्राइवेट वाहन दौड़ रहे हैं जो 15 साल से ज्यादा उम्र पूरी कर चुके हैं. हालांकि अभी तक प्राइवेट वाहनों के रि रजिस्ट्रेशन का विकल्प है. इसलिए ऐसा होता रहा है, लेकिन अब एटीएस पर जब वाहनों की जांच होगी तो बहुत कम ही वाहन ऐसे होंगे जो वाकई सड़क पर चलने लायक बचे रहेंगे और उनका रि रजिस्ट्रेशन हो सकेगा.
लखनऊ के एआरटीओ (ट्रांस गोमती) हिमांशु जैन ने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से ऐसे दिशा निर्देश आए हैं कि 15 साल पुराने प्राइवेट वाहनों के रजिस्ट्रेशन से पहले उनका ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाए. मशीनों पर जांच के बाद अगर वाहन फिट पाया जाएगा तो इसका आरटीओ कार्यालय में रि रजिस्ट्रेशन होगा. अगर फिटनेस फेल हो जाती है तो फिर वाहन का पुनर्पंजीयन नहीं हो सकेगा. आठ मई को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का आदेश आ चुका है.

