नई दिल्ली, 19 मई (ता)। उत्तर भारत में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। आने वाले दिनों में गर्मी और प्रचंड रूप दिखाने वाली है। इसका मुख्य कारण है नौतपा। ये वह 9 दिन होते हैं जब सूरज अपने उग्र रूप में होता है। इस समय सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। यह घटना हर साल घटती है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में एंट्री करते ही तापमान बढ़ जाता है और भीषण गर्मी पड़ती है और लू चलती है। इस साल सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र 25 मई को 15ः37 बजे प्रवेश करेंगे। इसके बाद सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून को 13ः33 बजे तक अर्थात 15 दिन रहेंगे।
ऐसे में सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के प्रारंभ के नौ दिन तक नौतपा का प्रभाव रहेगा। 8 जून को ही सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे और 15 जून को मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से नौतपा भी प्रारंभ हो जाएंगे। नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सर्वाेच्च ताप में होना है यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है।
नौतपा किस समय लगता है
नौतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से 9 नक्षत्रों तक यानी 9 दिनों तक रहता है। यह आवश्यक नहीं है कि नवतपा में अधिक गर्मी हो। आर्द्रा के 10 नक्षत्रों तक, जो सबसे अधिक गर्मी प्राप्त करता है, बाद में सूर्य उस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है और अच्छी वर्षा होती है। नौतपा की शुरुआत भी रोहिणी नक्षत्र से होगी। नौतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और बारिश की संभावना रहती है। नौतपा समय की ग्रह स्थिति तेज हवा, बवंडर और बारिश का संकेत दे रही है। इस बार 25 मई से नौतपा शुरू होंगे और 3 जून तक रहेंगे।
नौतपा में बारिश हो तो क्या होता है
नौतपा को लेकर लोक मान्यता है कि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो आगे के दिनों में अच्छी बारिश होती है। वहीं, ज्योतिष के अनुसार, यदि नौतपा में बारिश हो जाए तो आने वाले समय में बारिश में कमी रहती है। 25 मई से 2 जून तक नौतपा का प्रभाव अपने चरम पर होगा और तेज धूप व गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
मानसून का गर्भकाल
सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण यह मानसून का गर्भ आ जाता है और इसी कारण नौतपा को मानसून का गर्भकाल माना जाता है। ऐसे में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है तो उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं।
नौतपा में क्या करें क्या न करें
नौतपा के दौरान सूर्यदेव की उपासना करना बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है। इस दौरान सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी उपासना करनी चाहिए। नौतपा के 9 दिन सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए आदित्यहृदय स्रोत का पाठ करें।
सूर्यदेव को रोजाना जल अर्पित करें। जल अर्पित करने के लिए एक तांबे के लौटे पर थोड़ा चावल, गुड़, रोली या लाल गुलाब का फूल डालकर ही सूर्यदेव को जल अर्पित करें और जल अर्पित करते समय सूर्य के मंत्रों का जप करें।
नौतपा के 9 दिन शरबत, सत्तू, जल का घड़ा, पंखे मौसमी सब्जियां आदि का दान जरुरतमंद लोगों को करें। इस दौरान लोगों को जल पीलाना भी बहुत शुभ माना गया है। ऐसे में जितना हो सके लोगों को पानी पिलाएं।
नौतपा के दौरान जितना हो सके सात्विक भोजन ही करें। तामसिक भोजन से परहेज करें।
नौतपा के दौरान बासी खाने से परहेज करें। जितना हो सके ताजा भोजन ही करें।
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