मेरठ 18 मई (प्र)। फर्जी डिग्री और उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के जाली रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल थाना क्षेत्र में सहारा हॉस्पिटल संचालित किया जा रहा था। आईजीआरएस पर हुई शिकायत के बाद सीएमओ की जांच में यह खुलासा हुआ। दिल्ली निवासी मोहम्मद साजिद की तहरीर पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अस्पताल के संचालक सुकुमार यादव समेत अनिता यादव, इकबाल, सदफ इकबाल, वसीफ तथा तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। सभी आरोपी एक संगठित गिरोह की तरह काम करते थे और लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाने के लिए अस्पताल से फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र बनाते थे।
दिल्ली के गोविंदपुरी निवासी पीड़ित मोहम्मद साजिद ने शनिवार को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बताया कि सुकुमार यादव व अन्य आरोपियों ने सहारा हॉस्पिटल का पंजीकरण कथित रूप से फर्जी डिग्रियों तथा उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के जाली प्रमाणपत्रों के आधार पर कराया था। पीड़ित ने इस पूरे मामले में दो साल पहले आईजीआरएस (जनसुनवाई पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई थी।
आईजीआरएस के माध्यम से मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के संज्ञान में आया जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस पर त्वरित जांच शुरू की। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज पूरी तरह संदिग्ध पाए गए थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जब संबंधित शिक्षण संस्थानों से यहां डॉक्टर बनकर काम कर रहे लोगों की डिग्रियों और प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया तो वे पूरी तरह फर्जी और कूटरचित पाए गए इसके बाद सीएमओ कार्यालय ने अस्पताल पंजीकरण निरस्त कर दिया था।
अलीगढ़, बुलंदशहर और हाथरस में भी सक्रिय है गिरोह
दर्ज कराई शिकायत के अनुसार यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा है। आरोप है कि यही सिंडिकेट अलीगढ़, बुलंदशहर और हाथरस जैसे विभिन्न जिलों में भी अलग-अलग नामों से अस्पतालों का संचालन कर रहा है। शिकायत में उल्लेख है कि अलीगढ़ स्थित ज्ञान श्री और देव हॉस्पिटल व बुलंदशहर के ममता नर्सिंग होम और गौड़ हॉस्पिटल पर भी कार्रवाई हो चुकी है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और ब्लैकमेलिंग से जुड़ा है। वहीं, सीएमओ डॉ. अशोक कटियार का कहना है कि उनके चार्ज संभालने से पूर्व का मामला है। शिकायत के बाद विभाग की ओर से प्रकरण में जांच की गई थी।
ब्लैकमेलिंग और फर्जी मुकदमों का बड़ा नेटवर्क
तहरीर में गिरोह के तौर-तरीकों को लेकर भी बेहद चौकाने वाले खुलासे किए गए हैं। आरोप है कि यह गिरोह प्रतिष्ठित और सरकारी नौकरी करने वाले युवकों को प्रेमजाल और विवाह के झांसे में फंसाता था। इसके बाद उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती थी। इन अवैध रूप से संचालित अस्पतालों में तैयार की जाने वाली मनगढ़ंत मेडिकल रिपोर्ट्स को ही मुकदमों का मुख्य आधार बनाया जाता था ताकि कोर्ट कचहरी का दबाव बनाया जा सके। इसके बाद मामले में समझौते के नाम पर पीड़ित युवकों से मोटी रकम की वसूली की जाती थी।

