Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • Youtube लाया कमाल का सेफ्टी फीचर, Deepfake वीडियो को पहचानना हुआ आसान
    • बीए की छात्रा हत्याकांड: अंतिम संस्कार के बाद गांव में तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा, बैरिकेडिंग कर रूट डायवर्ट
    • स्वस्थ जीवन के तीन सूत्र – नियमित दिनचर्या, सात्विक भोजन और प्रतिदिन योगाभ्यास: देसराज
    • श्रीलंका और भारत के बीच अगस्त महीने में दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी
    • मैं सुनकर समझता हूं विजन, स्क्रिप्ट पढ़ता नहीं : सलमान खान
    • सरकारी विभागों में जब अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं तो प्राइवेट एजेंसियों की सेवाएं लेकर जनता पर दोहरी आर्थिक मार क्यों
    • गाजीपुर में 9 प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण का प्रस्ताव तैयार
    • यूपी पंचायत चुनाव में लागू होगा ओबीसी आरक्षण, योगी कैबिनेट में मिली मंजूरी
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»न्यूनतम मजदूरी से भी वंचित हैं पुजारी !
    देश

    न्यूनतम मजदूरी से भी वंचित हैं पुजारी !

    adminBy adminMay 11, 2026No Comments2 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली, 11 मई (ता)। देश के लाखों मंदिरों का संचालन करने वाली सरकारें क्या अपने ही कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं? यह गंभीर प्रश्न उच्चतम न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका के माध्यम से सामने आया है।
    अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है, जो सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों, सेवादारों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं की समीक्षा कर सके।
    याचिका का मुख्य तर्क यह है कि जब राज्य किसी मंदिर का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण अपने हाथ में ले लेता है, तो वहां नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध स्वतः स्थापित हो जाता है। ऐसे में पुजारियों को सम्मानजनक वेतन न देना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले आजीविका के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
    न्यूनतम मजदूरी से भी वंचित हैं पुजारी याचिका में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और दक्षिण भारत के मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि इन पवित्र स्थानों पर दिन-रात सेवा करने वाले कर्मचारियों को अकुशल श्रमिकों के बराबर भी न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है। रंपरा बनाम प्रशासनिक कड़वाहट याचिका में तमिलनाडु की एक घटना का विशेष उल्लेख है, जहां प्रशासन ने पुजारियों को श्दक्षिणाश् लेने से रोकने का प्रयास किया था। यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि कई मंदिरों में पुजारियों को औपचारिक वेतन नहीं मिलता और वे पूरी तरह दक्षिणा पर निर्भर हैं।
    2026 के महंगाई सूचकांक के दौर में, बिना किसी निश्चित आय के इन पुजारियों का जीवन भुखमरी की कगार पर है। याचिका में यह चुभता हुआ सवाल भी उठाया गया है कि सरकारें केवल लाखों मंदिरों को ही नियंत्रित क्यों कर रही हैं, जबकि अन्य धार्मिक स्थल इस प्रशासनिक पकड़ से बाहर हैं। अब देखना यह है कि क्या न्यायालय इन आध्यात्मिक रक्षकों को उनके हक का सम्मान दिला पाता है।

    Desh New Delhi Priests are deprived even of the minimum wage! Supreme Court tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    Youtube लाया कमाल का सेफ्टी फीचर, Deepfake वीडियो को पहचानना हुआ आसान

    May 18, 2026

    बीए की छात्रा हत्याकांड: अंतिम संस्कार के बाद गांव में तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा, बैरिकेडिंग कर रूट डायवर्ट

    May 18, 2026

    स्वस्थ जीवन के तीन सूत्र – नियमित दिनचर्या, सात्विक भोजन और प्रतिदिन योगाभ्यास: देसराज

    May 18, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.