मेरठ 09 मई (प्र)। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बिजौली में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की नींव रख दी गई है। चयनित कंपनी ने प्रस्तावित स्थल पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। जलापूर्ति के लिए तीन ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं। इसके लिए बोरिंग हो गई है। शुक्रवार को जेसीबी चलाकर गलियारा के पहले फेज की भूमि को समतल करने काम शुरू कर दिया गया।
इसके अलावा भूमिगत बिजली लाइन, सीवर लाइन के लिए पैमाइश शुरू हो गई है। विकास कार्य पूरा होते ही देश-विदेश की कंपनियों के लिए भूमि आवंटन आरंभ कर दिया जाएगा। मेरठ में लगभग 500 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक गलियारा प्रस्तावित है। इसमें से बिजली की लगभग 214 हेक्टेयर जमीन पर पहले फेज में औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाएगा। यह भूमि बिजीली और खरखौदा के किसानों की है। इस भूमि पर चहारदीवारी बनाने और जलापूर्ति, सीवर लाइन, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य एक कंपनी को सौंपा गया है। पहले चरण में कंपनी ने औद्योगिक गलियारे की जमीन पर जगह-जगह ट्यूबवेल लगाने का काम शुरू कर दिया है।
उप्र औद्योगिक एक्सप्रेसवे विकास प्राधिकरण ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले औद्योगिक गलियारे को विकसित करने का लक्ष्य रखा है। चयनित कंपनी ने गंगा एक्सप्रेसवे लोकार्पण से पहले ही बिजली में अपना अस्थायी कार्यालय खोल दिया था, तभी से कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनी भूखंडों का नियोजन करने के साथ आवश्यक ढांचागत विकास करेगी। प्रदेश सरकार की पहल पर देश और विदेश की कई कंपनियां यहां उद्योग लगाने में रुचि दिखा रही हैं।
मेरठ समेत 11 अन्य जिलों में विकसित होंगे औद्योगिक गलियारे
गंगा एक्सप्रेसवे किनारे मेरठ से प्रयागराज तक मेरठ समेत 11 जिलों में औद्योगिक गलियारा विकसित होने से यूपी का महत्व और बढ़ जाएगा। देश ही नहीं बल्कि विदेशी कंपनियां भी इस औद्योगिक गलियारे में उत्पाद तैयार करेगी बेरोजगारों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इससे मेरठ क्षेत्र के करीब 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने का अनुमान है।
यूपीडा अधिशासी अभियंता राकेश मोगा का कहना है कि दो माह के भीतर औद्योगिक गलियारे में इकाइयों की नींव रखी जानी शुरू हो जाएंगी। कंपनी के कर्मचारी रात-दिन काम कर रहे हैं। पहली प्राथमिकता पानी है, इसलिए औद्योगिक गलियारे में जलापूर्ति के लिए ट्यूबवेल लगाई जा रही हैं। जेसीबी से जमीन का समतल किया जा रहा है।

