नई दिल्ली, 14 फरवरी। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने गत दिवस संसद में बताया कि पिछले दस सालों में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के ऑफिस को मौजूदा जजों के खिलाफ 8,360 शिकायतें मिली हैं. यह जानकारी शुक्रवार को लोकसभा में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद (एमपी) मथेश्वरन वी.एस. के एक सवाल के जवाब में दी गई। सांसद ने ने हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ मिली भ्रष्टाचार, यौन दुर्व्यवहार या दूसरी गंभीर गड़बड़ियों से जुड़ी शिकायतों की लिस्ट मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट से मिले डेटा के मुताबिक कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जवाब दिया कि 2016-2025 के बीच 8,360 शिकायतें मिलीं। मथेश्वरन ने यह भी पूछा कि क्या इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई की गई। हालांकि, कानून मंत्रालय के जवाब में उस पहलू पर ध्यान नहीं दिया गया। इसने यह भी नहीं बताया कि शिकायतों पर की गई कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड क्यों नहीं था।
एक और सवाल यह उठाया गया कि क्या केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ मिली भ्रष्टाचार, यौन दुर्व्यवहार या दूसरी गंभीर अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों का रिकॉर्ड या डेटाबेस बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी सिस्टम के बारे में पता है।
जवाब में इतना कहा गया कि भारत के चीफ जस्टिस और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस इन-हाउस प्रोसीजर के हिसाब से जजों के खिलाफ शिकायतें लेने के काबिल हैं। जवाब में कहा गया कि हायर ज्यूडिशियरी के सदस्यों के खिलाफ सेंट्रलाइज़्ड पब्लिक ग्रिवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम या किसी और तरीके से मिली शिकायतें सीजेआई या संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजी जाती हैं।
मंत्री ने मथेश्वरन के इस सवाल का भी जवाब नहीं दिया कि क्या सरकार हायर ज्यूडिशियरी के सदस्यों के खिलाफ शिकायतों की सिस्टमैटिक रिकॉर्डिंग, मॉनिटरिंग और अकाउंटेबिलिटी पक्का करने के लिए गाइडलाइन जारी करने या कदम उठाने का सोच रही है।
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