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    Home»देश»65 वर्षीय बलात्कारी को फांसी की सजा सुनाई
    देश

    65 वर्षीय बलात्कारी को फांसी की सजा सुनाई

    adminBy adminJune 30, 2026No Comments2 Views
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    पुणे, 30 जून (ता)। पुणे ज़िले में साढ़े तीन साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के मामले में विशेष अदालत ने 65 वर्षीय भीमराव प्रभाकर कांबले को दोषी ठहराते हुए फांसी की सज़ा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश एसआर सालुंके ने यह फ़ैसला सुनाया। इस मामले की सुनवाई 25 जून को पूरी हुई थी। उस समय अदालत ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा था कि अभियुक्त दोषी है. पुणे की विशेष अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि अभियुक्त ने बलात्कार और हत्या दोनों अपराध किए हैं।
    यह फ़ैसला राज्य के सबसे तेज़ी से सुने और निपटाए गए मामलों में से एक बन गया है। फ़ैसला पढ़ते हुए जज सालुंके ने कहा कि सज़ा के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सज़ा कम करने वाली परिस्थितियों पर विचार किया. अधिवक्ता अजय मिसर ने तर्क दिया कि इस मामले में मृत्युदंड दिया जा सकता है. इसके लिए उन्होंने विभिन्न मामलों के 12 न्यायिक संदर्भ दिए। अदालत ने शंकर खड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का भी हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड देते समय विचार किए जाने वाले कुछ मानदंड तय किए हैं।
    अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि यह अपराध केवल तीन साल की बच्ची के ख़िलाफ़ किया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अपराध की क्रूरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह भी साबित करती है कि अभियुक्त पर मृत्युदंड के मानदंड लागू होते हैं। अदालत ने कहा कि अपराध का मक़सद वासना की पूर्ति था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और ‘लास्ट सीन’ के साक्ष्य अपराध की गंभीरता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। चूंकि पीड़िता केवल तीन साल की थी और अभियुक्त ने उसके जीवित बचने की कोई संभावना नहीं छोड़ी, इसलिए यह मानदंड भी पूरा होता है। अदालत ने आगे दो सवाल उठाए। पहला, क्या इस मामले में ऐसी असाधारण परिस्थितियां हैं, जिनके कारण उम्र क़ैद अपर्याप्त मानी जाए। इसके जवाब में अदालत ने कहा कि इस अपराध में कई असाधारण और गंभीर परिस्थितियां मौजूद हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अभियुक्त ने बच्ची की मौत के बाद भी उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
    दूसरा सवाल था कि क्या मृत्युदंड के अलावा कोई दूसरा विकल्प मौजूद है। अदालत ने कहा कि अभियुक्त के पक्ष में ऐसी कोई परिस्थिति पेश नहीं की गई, जिससे सज़ा में कमी की जा सके। अदालत की ओर से कई अवसर दिए जाने के बावजूद अभियुक्त की ओर से कोई ऐसा साक्ष्य पेश नहीं किया गया।
    अभियुक्त के परिवार के सदस्य भी उसके पक्ष में कुछ रखने के लिए सामने नहीं आए। अदालत ने कहा कि शंकर खड़े मामले में तय अंतिम मानदंड भी इस मामले में लागू होते हैं। यह अपराध अत्यंत क्रूर प्रकृति का है और इससे समाज में गहरा आक्रोश और घृणा पैदा हुई है। इस अपराध ने अदालत की अंतरात्मा को भी झकझोर दिया है और अभियुक्त समाज के लिए एक ख़तरनाक व्यक्ति साबित होता है। अदालत ने कहा कि यह अपराध बिना किसी उकसावे के किया गया। सज़ा तय करते समय अभियुक्त के पिछले रिकॉर्ड पर भी विचार किया गया। एक पुराने मामले में अभियोजन पक्ष की जांच में खामियों के कारण अभियुक्त बरी हो गया था। इसके अलावा एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने गवाही दी थी कि 1996 में अभियुक्त ने एक बकरी के साथ यौन संबंध बनाने की कोशिश की थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि अभियुक्त ने अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं दिखाया।
    मामला क्या है?
    एक मई 2026 को साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी। अभियुक्त बच्ची को, जो हाल ही में वहाँ रहने आई थी, पास की एक गोशाला में ले गया। वहाँ उसने बच्ची को प्रताड़ित किया और उसकी हत्या कर दी। जब बच्ची नहीं मिली तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में उसका शव पास के एक खलिहान में मिला। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया. ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया और सड़क को जाम कर दिया। इसके बाद पुणे में भी विरोध प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारियों ने अभियुक्त के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा की मांग की। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी. इलाके के सीसीटीवी फुटेज में अभियुक्त बच्ची को ले जाता हुआ दिखाई दिया। तलाश के बाद पुलिस ने डेढ़ घंटे के भीतर अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया। अभियुक्त के ख़िलाफ़ पॉक्सो क़ानून समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पता चला कि अभियुक्त के ख़िलाफ़ पहले भी इसी तरह के मामले दर्ज हुए थे, लेकिन वह बरी हो चुका था। मीडिया में अभियुक्त के परिवार की प्रतिक्रिया भी सामने आई. परिवार ने कहा कि वे उसका चेहरा तक नहीं देखना चाहते। यह देश के सबसे तेज़ी से सुने गए मामलों में से एक है. इससे पहले बिहार में 2021 के एक मामले में अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई और फ़ैसला एक ही दिन में पूरा किया था। जुलाई 2021 में एक 8 साल की बच्ची के साथ बलात्कार हुआ था। घटना के अगले दिन मामला दर्ज हुआ. अक्तूबर में अदालत ने एक ही दिन में सुनवाई पूरी कर अभियुक्त को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई। हालांकि मामला दर्ज होने से फ़ैसले तक लगभग तीन महीने लगे थे। वहीं वाशी के एक पॉक्सो मामले में 45 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर मृत्युदंड सुनाया गया था। इस मामले में सुनवाई की प्रक्रिया लगभग 50 दिनों में पूरी हुई।

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