देश के 447 जिलों के नागरिक शुद्ध हवा से मरहूम हैं। तमाम जिलों के महानगरों को जोड़ने वाले रास्तों पर गंदगी और कूड़ा जलाने से प्रदूषण फैल रहा है उससे कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। प्रदूषण बढ़ने की कार्रवाई भी सर्वमान्य है। हर कोई जानता है कि जिम्मेदार कौन है और अब दुनिया में इथियोरिया में हुए ज्वालामुखी विस्फोट के असर से आम आदमी को बचाने के लिए कई विमान उड़ाने रद कर दी गई लेकिन पानी और हवा किसी से नहीं रूकती। ज्वालामुखी का कहर सबको ही भुगतना पड़ेगा क्योंकि इसकी जहरीली हवा दूर दूर तक अपना असर दिखाएगी। बताते हैंं कि ज्वालामुखी में १२ हजार साल बाद गत रविवार को हुए विस्फोट के बाद के बाद खतरे की आशंका को भले ही नकारा जा रहा हो लेकिन वायु प्रदूषण तो फैलेगा ही। ऐसे में हमें स्थानीय स्तरों पर गंदगी और कूड़ा जलाने से फैल रहे प्रदूषण को रोकने के लिए उपायों से इनकार नहीं किया जा सकता। दिल्ली के प्रदूषण को लेकर पीएमओ सख्त हो रहा है। तथा इस बारे में प्रभावी कदम उठाने की बात सामने आ रही है। इस सबके बावजूद कुछ डॉक्टर लोगों के मास्क लगाने की सलाह तो दे रहे हैं लेकिन प्रदूषण के लिए कौन जिम्मेदार है और इसका समाधान कैसे हो, इसके बारे में सरकार को कोई सलाह नहीं दी जा रही है। मेरा मानना है कि प्रदूषण को समाप्त करने के लिए हमें मिलकर प्रयास करना होगा लेकिन सबसे ज्यादा जिम्मेदारी नगर निगम नगर पंचायतों के अधिकारियों की है। डॉक्टर साहब आप भी मास्क निर्माताओं की आमदनी बढ़ाने वाले बयान देने से पहले इसकी रोकथाम के सुझाव सरकार को सुझाइये। प्रदूषण का नुकसान प्रभावित तो करेगा लेकिन जैसा डर फैलाया जा रहा है इस नाम पर वो नहीं होना चाहिए। मैं सात दशक से ऊपर पहुंच चुका है। दिनभर शहर की सड़को ंपर घूमता हूं लेकिन कोरोना रहा हो या प्रदूषण मुझ पर तो कोई असर नहीं दिखाई दे रहा । अगर नागरिक मनन करे तो प्रदूषण को लेकर जो मीडिया की खबरों को छोड़ दें तो कोई भी बड़े अफसरों से शिकायत करता नजर नहीं आ रहा है। इसकी रोकथाम की व्यवस्था हो लेकिन डर फैलाने की कोशिश ना हो क्योंकि इससे संबंध अफवाहे समाज में पैनिक फैला सकती है जिसे ठीक नहीं कहा जा सकता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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