कोलकाता, 02 जून (ता)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गत दिवस तृणमूल कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी नकद अंतरण योजना ‘लक्ष्मीर भंडार’ में व्यापक धांधली की जांच के लिए एसआईटी बनाने का आदेश देकर प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी है। राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी सरकार की इस योजना में करीब 30 लाख खाते पूरी तरह फर्जी पाये गये हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि महिलाओं के लिए बनी इस वित्तीय सहायता योजना का लाभ फर्जी दस्तावेजों के सहारे पुरुषों ने उठाया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) इस महा-घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (ैप्ज्) का गठन करने जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घोटाले के मॉडस ऑपरेंडी (काम करने के तरीके) का खुलासा करते हुए सबको चौंका दिया। सरकारी फाइलों में हेर-फेर करके पुरुषों को महिला लाभार्थी के रूप में दर्ज किया गया और उनके खातों में हर महीने सरकारी पैसा ट्रांसफर होता रहा. मुख्यमंत्री ने कहा कि झूठे दावों और जालसाजी के जरिये योजना का लाभ उठाने के आरोप में कुछ पुरुषों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि बंगाल में तो हद पुरूष भी विधवा भत्ता का रुपये पा रहा था। उन्होंने यह पूछने पर कि क्या इसकी मनी लांड्रिंग की भी जांच होगी तो उन्होंने कहा कि अभी एसआइटी की जांच होने दीजिए।
मुख्यमंत्री ने इस महाघोटाले की जड़ तक जाने के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित करने का कड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने पहले भी कहा था कि बंगाल में 30 लाख फर्जी लोगों को मिल रही थी लक्ष्मी भंडार योजना की राशि। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि जब हम 20 रुपये की भिंडी खरीदते हैं तो उसे भी जांच-परख कर देखते हैं, यहां तो सरकार साल के 36 हजार रुपये देगी, तो जांच क्यों न हो? घुसपैठियों और तृणमूल के भ्रष्ट नेताओं को बख्शा नहीं जाएगा।
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