नई दिल्ली, 21 अप्रैल (ता)। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम से बड़ा डिजिटल बदलाव शुरू किया है। इसके तहत सिर्फ 3 महीनों में 100 से ज्यादा संस्थाएं जुड़ चुकी हैं। अब बिना केंद्रीय डेटाबेस से जुड़े क्यूआर और डिजिटल सिग्नेचर से पहचान सत्यापन होगा। इससे कागजी काम कम होगा, सेवाएं तेज होंगी और नागरिकों का डेटा नियंत्रण में रहेगा। सरकार ने डिजिटल पहचान व्यवस्था को और सुरक्षित और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के तहत आधार आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम शुरू होने के सिर्फ तीन महीनों में 100 से ज्यादा संस्थाएं इससे जुड़ गई हैं। इस नई व्यवस्था में अब पहचान की जांच बिना सीधे केंद्रीय डाटाबेस से जुड़े भी की जा सकती है।
इसका मतलब है कि अब नागरिकों को कागजों और बार-बार दस्तावेज दिखाने की जरूरत कम होगी और प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो सकेगी। इस सिस्टम में लोग क्यूआर कोड या डिजिटल साइन किए हुए दस्तावेजों के जरिए अपनी जरूरी जानकारी साझा कर सकते हैं।
इतना ही नहीं अब इसमें व्यक्ति खुद तय करेगा कि कौन-सी जानकारी किसे देनी है, जिससे उसकी निजी जानकारी पर नियंत्रण बना रहेगा। सरकार के अनुसार इस सिस्टम से सरकारी विभागों, बैंकिंग और फिनटेक कंपनियों, होटल-इवेंट सेक्टर, शिक्षा संस्थानों और वेरिफिकेशन एजेंसियों को फायदा मिलेगा। इससे सेवाएं तेज होंगी और कामकाज में लगने वाला समय कम होगा।
इसके साथ ही इस मामले में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा है कि यह कदम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और लोगों के जीवन को आसान बनाएगा। सरकार का दावा है कि इस सिस्टम से पहचान सत्यापन की प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। साथ ही, नागरिकों को तेजी से सेवाएं मिलेंगी और डेटा सुरक्षा भी बेहतर होगी।
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