विश्व की सबसे बड़ी और आम आदमी को खोखला करने में सक्षम शुगर की बीमारी का पहले तो अहसास ही नहीं हो पाता और लोगों को जब तक पता चलता है वो कई अन्य बीमारियों का भी शिकार हो जाते हैं। १४ नवंबर को मधुमेह दिवस मनाया जाता है। यह बीमारी धीरे धीरे कितना पैर पसार चुकी है इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि बच्चों को भी होने लगी है। जानकार कहते हैं कि टेंशन मत लो मीठा मत खाओ मुझे लगता है कि यह दोनों काम करने से भी इसका समाधान नहीं हो पाता। लेकिन डॉ तनुराज सिरोही की एक सलाह कि अगर कहीं जाना है तो घर से आधा घंटा पहले निकलो, कोई काम करना है तो पहले से विचार कर लो कहने का मतलब है कि जल्दबाजी में जो तनाव बढ़ता है उसे अपने से दूर रखों तो शुगर और बीपी की बीमारी कम जरूर हो जाती है। शुगर और किडनी का आपस में एक अनोखा रिश्ता होने की बात सामने आती रही है। उससे बचना है और काम पर इसका असर ना पड़े यह तय करना है तो हर व्यक्ति को ४० की उम्र में चीनी और उससे बनी चीजों को छोड़कर पैदल घूमना व्यायाम करना आदि करना चाहिए। प्रतिदिन तेज तेज चलें। पानी खूब पीयें इससे इंसुलिन और उसकी बढ़ती मात्रा रूक सकती है। अगर आप इसकी रोकथाम के उपायों को अपना ले और डॉक्टर की सलाह से काम करें। बढ़िया नींद और दिन में तीन चार बार शरीर को आराम दें और खाने के बाद पैदल घूमें। तो १४ नवंबर को मधुमेह दिवस मनाने का सकारात्मक उपयोग हो सकता है। खाने के बाद जरूर टहलें। दिनचर्या नियंत्रित होने खानपान सही रखने से मधुमेह से छुटकारा मिलने की बात से इनकार नहीं कर सकते। हर घर में सलाहकार जो खुद ५०० शुगर झेल रहे होते हैं उनसे जरूर सावधान रहना चाहिए क्योंकि मीठा तो नुकसान देगा ही।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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