एक जमाने में घर के चौक या चौपालों या किसी को बड़ी शादी करनी होती थी तो मंदिरों धर्मशालाओं में खर्च कर खुशहाली से संपन्न हो जाते थे। कुछ दशक तक शादी टूटने की खबरें भी इतनी सुनने को नहीं मिलती थी। वर्तमान में करोड़ों रुपये खर्च कर मां बाप अपनी संतानों की शादी करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। महंगों मंडपों में अपनी साख बचाने के लिए कितने ही परिवार अपना घर गिरवी रखकर या अपनी जमा पूंजी को खर्च कर उधार लेने से भी नहीं चूकते। यह फिजूलखर्ची कब खत्म होगी और कार्ड के साथ महंगी मिठाई के वितरण पर कब रोक लगेगी यह तो समय की बताएगा और क्योंकि परिस्थितियों में बदलाव हमेशा होता रहा है तो इस दिखावे पर भी ब्रेक लगेगा यह उम्मीद की जा सकती है। सबसे बड़ी समस्या दहेज एक्ट बनने से जो सामने आई वो दहेज के मामले में कार्रवाई किए जाने के बाद भी छोटी छोटी बातों को लेकर संबंध विच्छेद की घटनाएं बढ़ती जा रही है। अब दहेज की एफआईआर पर भी ससुराल वालों को एकदम गिरफ्तार नहीं किया जाता लेकिन अब बात बात में तलाक पत्नी का ससुराल से मायके जाकर वापस ना आना। पत्नी पति कंधे से कंधा मिलाकर चलें लेकिन अपनी मर्जी से नौकरी करने और फिर इसे लेकर विवाद होने की परिस्थितियां रिश्ते तुड़वाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही लगती है लेकिन चार दशक में देखा कि बेटी की शादी तय करते समय बताया जाता है कि पति की ऊपरी कमाई बहुत है। नंद शादी के बाद अपने घर चली जाएंगी। यह सुनकर लड़ेिकयां इच्छा बना लेती है और जब विवाद की शुरुआत होती है तो परिवार में अलगाव का कारण बनती है और इसका जिम्मेदार माता पिता भी कहे जा सकते हैं। मेरा मानना है कि पति पत्नी के टूटते रिश्तों को देखते हुए शादी से पहले दोनों को एक दूसरे को जानने का मौका मिलना चाहिए। पति की उपरी कमाई बताने की बजाय यह समझाया जाए कि जो कमाई हो उसमें से भविष्य के लिए भी कुछ बचाकर खर्चो में कटौती करें। यह समझाकर उसे भेजें तो शायद जीवन खुशहाली से चल ही सकता। बाकी डर कहे या प्यार अब बुजुर्ग ज्यादा दखलअंदाजी नहीं करते हैं। इसलिए छोटी बातों को नजरअंदाज किया जाने लगे तो पारिवारिक जीवन खुशहाल बन सकता है। रिश्ते जुडेु रहे इसके लिए बुजर्ग ज्यादा सलाह ना दें और बेटियों को अब यह भी पता चल रहा है कि पैसा कितनी मेहनत से कमाया जाता है। अगर सब समझदारी से काम ले तो परिवार में सब अच्छा बना रह सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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