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    Home»देश»पितृत्व अवकाश हो या कोई और सरकारी कर्मियों को दी जाने वाली सुविधा के आम आदमी को भी वो उपलब्ध कराई जाए, देश में संविधान एक है तो एक को उपहार और दूसरे को तिरस्कार क्यों
    देश

    पितृत्व अवकाश हो या कोई और सरकारी कर्मियों को दी जाने वाली सुविधा के आम आदमी को भी वो उपलब्ध कराई जाए, देश में संविधान एक है तो एक को उपहार और दूसरे को तिरस्कार क्यों

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMarch 18, 2026No Comments12 Views
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    दो बच्चे गोद ले चुकी हंसा नंदनी की ओर से २०२१ में दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए गए हैं कि केंद्र सरकार पितृत्व अवकाश के लिए भी कानून बनाए तथा बच्चा गोद लेने वाली महिला को तीन माह से कम हो या ज्यादा मातृत्व अवकाश के लिए १२ सप्ताह का प्रावधान किया गया था क्योंकि बच्चे के अच्छे विकास के लिए पिता का साथ रहना भी जरुरी बताया जा रहा है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है क्योंकि बच्चे को मां बाप का प्यार और संरक्षण मिले तो अच्छा विकास से आगे बढ़ सकते हैं। मैं सरकारी कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का विरोधी नहीं हॅूं और ना ही अदालत के किसी आदेश का विरोध कर रहा हूं लेकिन सामाजिक ढांचे और अर्थव्यवस्था बनी रहे इसके लिए जो अवकाश निरंतर बढ़ाए जा रहे हैं उनके बारे में किसान मजदूर व्यापारियों से ऐसा आदेश देने से पहले जमीनी जानकारी की जाए कि इस नियम के क्या क्या परिणाम हो सकत हैं और अगर ऐसा करने वालों को लगता है कि इसका कोई नुकसान नहीं होगा तो मैं अपनी बात दोहराता हूं कि गैर नौकरी पेशा महिला पुरुष को भी उसकी आय को आधार मानकर जिनके अवकाश सरकारी कर्मचारियों के लिए होते हैं उनकी तनख्वाह व लाभ जोड़कर उपलब्ध कराए जाएं। देश में संविधान एक है। हर आदमी के अधिकार बराबर है। गैर सरकारी व्यक्ति टैक्स देकर सरकार चलाने में योगदान कर रहा है तो जहां कर्मचारी दस की बजाय ११ बजे कार्यालय पहुंचते हैं गैर नौकरीपेशा सुबह से उठकर अपने काम पर निकल जाता है। तो फिर जो सुविधाएं नौकरीपोशा को सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराने की नीति बनाई जा रही है तो आम आदमी को ऐसे लाभ क्यों नहीं मिलते। मेरा मानना है कि टैक्स देने वालों को पेंशन व अन्य सुविधाएं तय करें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो यह दोहरी नीति भी कही जा सकती है जिसके नियमों व सिद्धांतों में कोई जगह नहीं है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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