पटना 13 मार्च। बिहार मेडिकल सर्विसेज और इंफ्रास्ट्रक्चर के DGM पंकज कुमार के घर पर पड़ा छापा अब सुर्खियों में है। गुरुवार को स्पेशल विजिलेंस यूनिट की रेड के दौरान उनकी पत्नी के पर्स से लेकर कूड़ेदान तक में नोट ठूंसे पड़े थे। कूड़ेदान में इसलिए कि जब SUV (Special Vigilance Unit) की टीम उनके घर में घुसी तो वो घबराकर पैसे डस्टबिन में फेंकने लगे। एक साथ 4 ठिकानों पर रेड के दौरान SUV को जो मिला, उससे टीम भी हैरान रह गई।
बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी BMSICL डीजीएम प्रोजेक्ट पंकज कुमार के तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई. कार्रवाई के दौरान टीम को नकद राशि, महंगे आभूषण और कई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले.
जांच टीम को छापेमारी के दौरान 32 लाख रुपये नकद मिले. इसके अलावा हीरे, सोने और चांदी के जेवरात भी बरामद किए गए जिनकी कीमत करीब 1.31 करोड़ रुपये आंकी गई है. टीम को सोने के आभूषण खरीदने से जुड़ी 150 से अधिक रसीदें भी मिलीं. इसके साथ ही कई बैंक खातों से जुड़े कागजात और वित्तीय निवेश के दस्तावेज भी जब्त किए गए. जांच के दौरान अधिकारी ने नकद राशि और बरामद जेवरात को अपना बताया. अब इनकी खरीद और आय के स्रोत की जांच की जा रही है.
निगरानी टीम ने पटना में तीन अलग अलग जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया. पहला ठिकाना कदमकुआं स्थित कोनिका मैहर अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर 105 था. दूसरा स्थान सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के रानीघाट महेंद्रू इलाके में सुमति पथ स्थित आवास था. तीसरा स्थान पीएमसीएच परिसर में स्थित कार्यालय था. तलाशी के दौरान अधिकारी और उनकी पत्नी के नाम कई अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी मिले. इनमें कंकड़बाग के पृथ्वीपुरा इलाके में स्थित शिवम अपार्टमेंट के दो फ्लैट शामिल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा कदमकुआं स्थित फ्लैट के कागजात भी जब्त किए गए.
जांच एजेंसियों के अनुसार, पंकज कुमार ने बिहार सरकार में लोक सेवक के रूप में लगभग 13 साल तक सेवा दी. इस दौरान उन्होंने अपनी आय से करीब 96 लाख 46 हजार 666 रुपये अधिक संपत्ति अर्जित की. इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(b), 13(2) और 12 के तहत केस दर्ज किया गया है. कांड संख्या 10/2026 के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है. तलाशी वारंट विजिलेंस कोर्ट के स्पेशल जज की ओर से जारी किया गया था.
बता दें कि बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड राज्य के स्वास्थ्य विभाग की अहम संस्था मानी जाती है. इस संस्था के माध्यम से मेडिकल उपकरणों की खरीद, अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य ढांचे से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट संचालित होते हैं. ऐसे में इस स्तर के अधिकारी के पास बड़ी मात्रा में संपत्ति मिलने से कई सवाल उठने लगे हैं. जांच एजेंसियां अब बरामद दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की गहराई से जांच कर रही हैं.
निगरानी विभाग की टीम का मानना है कि जांच के दौरान और संपत्तियों का पता चल सकता है. फिलहाल बरामद दस्तावेजों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.

