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    Home»देश»वांगचुक का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा रोकने के लिए था : गीतांजलि
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    वांगचुक का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा रोकने के लिए था : गीतांजलि

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJanuary 9, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 09 जनवरी। लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा को रोकने लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और वांगचुक को अपराधी की तरह दिखाने की कोशिश की जा रही है।
    गत दिवस सुनवाई में वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल वांगचुक के भाषण का वीडियो चलाकर कहा कि यह भाषण अनशन तोड़ते समय दिया गया था, जिसमें वांगचुक ने साफ कहा था कि वे किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार नहीं करते और लोगों से हिंसा रोकने की अपील कर रहे थे। सिब्बल ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी चौरी-चौरा कांड के बाद इसी तरह हिंसा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। वांगचुक को उनकी हिरासत के पूरे आधार नहीं बताए गए और न ही उन्हें इसके खिलाफ सही तरीके से अपनी बात रखने का मौका दिया गया। 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। सोनम वांगचुक फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में हैं। अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी। सिब्बल ने यह भी कहा कि हिरासत के आधार वांगचुक को करीब 28 दिन की देरी से दिए गए जो संविधान के अनुच्छेद 22 का स्पष्ट उल्लंघन है।
    कपिल सिब्बल ने कहा कि अनुच्छेद 22 मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत से नागरिकों की सुरक्षा करता है। उन्होंने दलील दी कि अगर हिरासत के आधार और सबूत समय पर नहीं दिए जाएं, तो हिरासत का आदेश अपने-आप गलत हो जाता है।
    इससे पहले लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा था कि सोनम वांगचुक ने राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के खिलाफ गतिविधियां कीं, इसलिए उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया। प्रशासन का कहना है कि उन्हें सभी जरूरी दस्तावेज दिए गए और हिरासत गैरकानूनी नहीं है।
    गीतांजलि अंगमो ने अपनी याचिका में कहा कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया के जरिए हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख की शांतिपूर्ण तपस्या और पिछले पांच सालों का संघर्ष विफल हो जाएगा। उनके मुताबिक, वह दिन वांगचुक के जीवन का सबसे दुखद दिन था।

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