विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या के डीसीपी को लिखे अपने पत्र पर और सफाई दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं ने जो बयान दिए हैं, उनसे जांच में बड़ी मदद मिल सकती है। आलोक कुमार के मुताबिक, राम गोपाल यादव ने कहा कि यह 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला है और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी हजारों करोड़ के चंदे की बात कही है।
विहिप अध्यक्ष ने कहा, “ये सभी बड़े, पढ़े-लिखे लोग हैं और लंबे समय से ऊंचे पदों पर रहे हैं, इसलिए वे किसी न किसी आधार पर ही ऐसा कह रहे होंगे।” उन्होंने साफ किया कि उनके पत्र में कोई आरोप नहीं है, बल्कि उन्होंने सिर्फ यह कहा है कि पुलिस इन नेताओं से सबूत, जानकारी या गवाह मांगे ताकि जांच पूरी हो सके।
चोरी हो या डकैती, जांच से ही सच आएगा सामने
राम मंदिर चंदे में हेराफेरी के आरोपों पर आलोक कुमार ने कहा कि विहिप ने हर एक आरोप की बारीकी से जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “कोई इसे चोरी कहे, लूट कहे या डकैती, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता; असल में क्या हुआ था, यह सिर्फ जांच से ही साफ होगा।” इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की टिप्पणियों पर कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया।
अयोध्या से दिल्ली बैठक शिफ्ट होने पर उठाए सवाल का जवाब
विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय समिति की बैठक को अयोध्या से दिल्ली शिफ्ट किए जाने के सवाल पर आलोक कुमार ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बैठक कहाँ आयोजित की जाए, इस पर कोई सवाल नहीं होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जून में अयोध्या में बैठक की योजना थी, लेकिन वहां के कुछ स्थानीय घटनाक्रमों के कारण व्यवस्था करने में दिक्कतें आईं, जिसकी वजह से बैठक को टालना पड़ा। अब यह बैठक दिल्ली में हो रही है। उन्होंने दोटूक कहा कि किसी को भी विहिप को यह सलाह देने या सवाल उठाने का हक नहीं है कि बैठक अयोध्या में क्यों नहीं हो रही है। संगठन अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी बैठक करने के लिए स्वतंत्र है।

