लखनऊ 02 फरवरी। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी मदरसों के वित्तीय लेन-देन की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है. जांच का मुख्य उद्देश्य मदरसों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग के स्रोतों का पता लगाना है. यह कार्रवाई केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मदरसा संचालकों के निजी बैंक खातों की भी समीक्षा की जाएगी. सरकार के निर्देश पर संबंधित एजेंसियां मदरसों और उनके संचालकों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगालेंगी, ताकि किसी भी संदिग्ध लेनदेन या अवैध फंडिंग की जानकारी सामने लाई जा सके. इससे यह स्पष्ट होगा कि धन कहां से आ रहा है और उसका उपयोग कैसे हो रहा है.
एक महत्वपूर्ण पहलू मदरसों के भवन निर्माण में लगने वाली राशि का स्रोत पता लगाना भी है. कई मामलों में देखा गया है कि कुछ मदरसों में आय के ज्ञात स्रोतों से मेल नहीं खाती, लेकिन आधुनिक और बड़े भवन बने हुए हैं. ऐसे मदरसों के निर्माण खर्च की जांच विशेष रूप से की जाएगी, ताकि विदेशी फंडिंग या अनियमित स्रोतों से आए धन का उपयोग स्पष्ट हो सके.
यह कदम योगी आदित्यनाथ सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें सुरक्षा, पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है. अधिकारियों का कहना है कि जांच एटीएस स्तर की विशेष जांच टीम (एसआईटी) या संबंधित एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी, जिसमें जिला स्तर पर भी रिपोर्ट मांगी जाएंगी. मदरसों से जुड़े सभी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और दानदाताओं की जानकारी जुटाई जाएगी.
प्रदेश में हजारों मदरसे संचालित हैं, जिनमें से कुछ को सरकारी अनुदान मिलता है, जबकि कई निजी दान और अन्य स्रोतों पर निर्भर हैं. सरकार का मानना है कि विदेशी फंडिंग यदि वैध तरीके से आ रही है तो कोई समस्या नहीं, लेकिन यदि इसमें कोई अनियमितता या गैरकानूनी चैनल शामिल हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने सभी मदरसा प्रबंधकों से अपील की है कि वे अपने वित्तीय रिकॉर्ड तैयार रखें और जांच में पूर्ण सहयोग करें. यह जांच प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है और इसमें समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.

