नई दिल्ली 20 मार्च। यूपी के स्थायी DGP का प्रपोजल फिलहाल अटक गया है। यूपीएससी ने प्रपोजल पर आपत्ति लगाकर मुख्य सचिव को लौटा दिया है। आयोग ने कहा- 2025 में बनी गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करके दोबारा भेजने को कहा है।
इसके लिए 3 महीने का समय है। जो प्रपोजल भेजा गया था, उसमें राजीव कृष्ण का स्थायी DGP बनना तय माना जा रहा था। उनको 31 मई, 2025 को यूपी का कार्यवाहक DGP बनाया गया था। उन्होंने प्रशांत कुमार की जगह ली थी। राजीव कृष्ण यूपी के लगातार 5वें कार्यवाहक DGP हैं।
DGP की रेस से सीनियर IPS रेणुका मिश्रा को बाहर कर दिया गया है। योगी सरकार ने उन्हें पुलिस भर्ती का पेपर लीक होने के मामले में जिम्मेदार माना है। 2024 में वह यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की चेयरमैन थीं। बोर्ड से हटाए जाने के बाद से वेटिंग में हैं। वो यूपी आईपीएस कॉडर की सबसे सीनियर अफसर हैं।
DGP नियुक्ति के लिए केंद्र के नियम सख्त हैं। UPSC तीन सबसे वरिष्ठ और बेदाग IPS अधिकारियों के नामों पर विचार करता है। कोई भी दोष साबित नहीं होना चाहिए। प्रशांत कुमार के रिटायरमेंट के बाद राजीव कृष्ण को कार्यवाहक DGP बनाया गया। उस समय वे सीनियरिटी लिस्ट में 12वें नंबर पर थे। उन्होंने 11 वरिष्ठ अधिकारियों को सुपरसीड (पीछे छोड़) कर यह पद संभाला था। अब नए प्रस्ताव में उनका नाम दूसरे स्थान पर है। इसका मतलब है कि समय के साथ वरिष्ठ अधिकारी रिटायर हो गए हैं। इससे उनकी सीनियरिटी बढ़ गई और वे टॉप-3 में आ गए।
जिन 11 IPS अधिकारियों को राजीव कृष्ण ने पीछे छोड़ा-
1989 बैच: सफी अहसन रिजवी, अशीष गुप्ता, आदित्य मिश्रा
1990 बैच: संदीप सालुंके, दलजीत चौधरी, रेणुका मिश्रा, बिजय कुमार मौर्य, एमके बशाल, तिलोत्मा वर्मा
1991 बैच: आलोक शर्मा और पीयूष आनंद
इनमें से रेणुका मिश्रा, आलोक शर्मा और पीयूष आनंद को छोड़कर बाकी सभी अब रिटायर हो चुके हैं। UPSC सीनियरिटी और करियर रिकॉर्ड देखकर टॉप-3 चुनता है। रिटायरमेंट के कारण अब राजीव कृष्ण योग्य सूची में ऊपर आ गए हैं।
यहां-यहां तैनात रहे राजीव कृष्ण
1991 में IPS बनने के बाद राजीव कृष्ण की पहली तैनाती प्रशिक्षु IPS के रूप में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुई थी। इसके बाद बरेली, कानपुर, अलीगढ़ में ASP के तौर पर तैनात रहे। 10 मार्च, 1997 को इन्हें पहली बार जिले की कमान सौंपी गई और फिरोजाबाद के SP बने।
इसके बाद वह इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, आगरा, लखनऊ, बरेली के SSP रहे। तब यूपी में मुलायम सिंह की सरकार थी। मायावती के शासनकाल में जब बड़े जिलों में SSP के स्थान पर DIG की तैनाती हो रही थी। उस समय इन्हें लखनऊ का DIG बनाया गया था।
राजीव कृष्ण मेरठ रेंज के IG भी बने थे। 2012 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए। सितंबर, 2017 में लौटे तो पहले पुलिस अकादमी मुरादाबाद में तैनाती दी गई। फिर 5 फरवरी, 2018 को इन्हें लखनऊ जोन का ADG बनाया गया। राजीव कृष्ण आगरा जोन में भी ढाई साल तक ADG जोन रहे थे।
राजीव कृष्ण के परिवार में दो पीढ़ियों से सिविल सेवाओं (IPS, IAS) और राजनीति में प्रभावशाली उपस्थिति है। पत्नी मीनाक्षी सिंह नोएडा में CBDT में डिप्टी सेक्रेटरी हैं।

