मेरठ। सरकार द्वारा छुटटे पैसे ना होने के नाम पर गोली-टॉफी या माचिस आदि कोई भी सामान जबरदस्ती दिये जाने पर रोक लगायी हुई है और इसमें सजा का भी प्रावधान बताया जाता है। अभी पिछले वर्ष एक फिल्म आई जिसमंें बैंकों में विभिन्न तरीकों से लिये जाने वाले शुल्क जो तय नहीं है मगर उनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता एक व्यक्ति जो फिल्म में इसके खिलाफ अभियान चलाया तो शुरू में तो लोगों ने उसे पागल बताया लेकिन जब वह कुछ पैसे का प्रकरण खुलकर आया तो वह अरबों का घोटाला सामने आया फिर भी हम जागरूक नहीं है या उलझने का समय नहीं है जो भी हो इसका फायदा अब सब उठा रहे हैं।
आप रेलवे में सफर करने के लिए टिकट ले रहे हैंे या रोडवेज बस में सफर करने के लिए टिकट लेते है। अथवा बिजली विभाग या टेलिफोन कार्यालय में बिल जमा कराते हैं तो रेजगारी न होने के नाम पर दुकान पर सामान लेने होटल में खाना खाने पहुंचते हैं तो छुट्टे न होने पर गोली टॉफी या माचिस पकड़ा दी जाती है और हम भी लेकर चल देते है। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि रेजगारी के नाम पर बड़ा व्यापार और वसूली अनकहे रूप में उपभोक्ता से हो रही हैं। बताते चलें कि कुछ वर्ष पूर्व एक खबर पढ़ी थी जिसमें ऐसा करने वालों के खिलाफ क्या-क्या कार्यवाहीं हो सकती है और छुट्टे पैसे लाना उपभोक्ता का काम नहीं है रेजगारी रखना हर उस कार्यालय दुकान या जहां पैसे का लेनदेन होता है। प्रिय पाठकों अपने हितों के लिए जागरूक हो जाओ क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आपने जो घर का बजट बनाया वह बिगड़ा है और जिसके यहां लेने और देने जा रहे है उसकी कमाई बढ़ती रहेगी इसके लिखाफ उपभोक्ता चाहे तो उपभोक्ता अदालत की शरण भी ली जा सकती है।
प्रस्तुति – सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के संस्थापक राष्ट्रीय महामंत्री मजीठिया बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य अंकित बिश्नोई
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