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    Home»देश»उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने अन्य 5 को दी बेल
    देश

    उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने अन्य 5 को दी बेल

    adminBy adminJanuary 5, 2026No Comments4 Views
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    नई दिल्ली 05 जनवरी। दिल्ली दंगों के आरोप में जेल में पिछले 5 सालों से बंद बंद छात्र एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. हालांकि अन्य 5 आरोपियों को जमानत दे दी है. जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने पिछले साल 10 दिसंबर को आरोपी और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. जो आज सुनाया गया है.

    मीरान हैदर ,गुल्फिशा फातिमा सहित 5 को मिली जमानत
    मीरान हैदर ,गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान , मुहम्मद शकील खान और शादाब अहमद को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत. सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को शर्तों के साथ जमानत दी है.

    दिल्ली पुलिस ने उनकी रिहाई का विरोध करने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाया था. कोर्ट ने उमर और शरजील की जमानत याचिका खारिज करते हुए चिंता जाहिर की है.

    कोर्ट ने कहा कि अभियोजन को लगातार कस्टडी की ज़रूरत है क्योंकि मामला आतंकी गतिविधियों से जुड़ा है. लोगों को मारने या विनाश के अलावा, यह प्रावधान उन कृत्यों को भी शामिल करता है जो सेवाओं को बाधित करते हैं. अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा करते हैं.

    जमानत पर कोर्ट की टिप्पणी
    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत बचाव का मूल्यांकन करने का मंच नहीं है. न्यायिक संयम का मतलब कर्तव्य से पीछे हटना नहीं है. अदालत को सही आवेदन के लिए एक व्यवस्थित जांच करनी होगी. यह देखना जरूरी है कि क्या जांच में प्रथम दृष्टया अपराध सामने आया है और क्या आरोपी की भूमिका का अपराध से कोई उचित संबंध है.

    उमर खालिद 13 सितंबर, 2020 से पुलिस हिरासत में है. वहीं इमाम को 28 जनवरी, 2020 से जेल में रखा गया है. आरोपियों ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष इसे जानबूझकर लंबा खींचने और ट्रायल में देरी करने के लिए एक-एक करके आरोपियों को गिरफ्तार करने की रणनीति अपना रहा है. 2020 के दंगे फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में हुए थे. ये दंगे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के विरोध प्रदर्शनों को लेकर हफ्तों के तनाव के बाद हुए थे. कई दिनों तक चली हिंसा में कई लोगों की मौत हुई. साथ ही घरों, दुकानों और पूजा स्थलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ.

    फिर दिल्ली पुलिस ने हिंसा की जांच की. इसे CAA के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी साजिश बताया. कई कार्यकर्ताओं, छात्रों और बुद्धिजीवियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कड़े कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया. इनमें JNU के पूर्व छात्र शरजील इमाम और कैंपस आंदोलन से जुड़े छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद शामिल थे. पुलिस ने आरोप लगाया कि उनके भाषण और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ाने में मदद की. इन दावों को दोनों ने ज़ोरदार तरीके से नकारा है.

    शरजील इमाम के जिन कामों को अदालत की सुनवाई में उन्हें जेल भेजने के लिए अहम सबूत के तौर पर पेश किया गया है, उनमें से एक वीडियो है जिसमें वह “चिकन नेक” कॉरिडोर को ब्लॉक करने और असम को बाकी भारत से अलग करने के बारे में बात करते दिख रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने एक और वीडियो का भी हवाला दिया है जिसमें शरजील इमाम ने कथित तौर पर ‘चक्का जाम’ करके दिल्ली में परेशानी बढ़ाने की योजना बताई थी. इससे दूध और सब्ज़ियों जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई बंद हो जाती.

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