अयोध्या 13 जून। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की धनराशि की चोरी के मामले में लगातार नए राजफाश हो रहे हैं। जांच के दायरे में आए ट्रस्ट के दो और कर्मचारी को पूछताछ के लिए शुक्रवार को पकड़ा गया है। इनमें एक ऐसा कर्मचारी भी शामिल है, जिसने हाल ही में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है, जबकि दूसरे ने 40 लाख रुपये का भूखंड लेकर उस पर मकान बनवाना शुरू किया है। यह कार्रवाई बिना एफआइआर दर्ज कराए की जा रही है। इस बीच यह भी सामने आया है कि गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाने का विरोध ट्रस्ट के ही एक पदाधिकारी ने किया था।
सूत्रों के अनुसार, रुदौली निवासी लवकुश नामक ट्रस्ट कर्मचारी से पूछताछ की जा रही है। वह दानराशि की गणना से जुड़े कार्य में शामिल रहा है। उसके घर से कुछ नकदी भी मिली है। उसने हाल में ही अयोध्या में लगभग 40 लाख रुपये का भूखंड खरीदा और वहां मकान निर्माण भी करा रहा है। मंदिर के गर्भगृह में तैनात एक अन्य कर्मचारी सेवारत तिवारी को भी पकड़ा गया है। महाकुंभ के दौरान चढ़ाए गए सोने- चांदी के आभूषणों को एकत्रित करने की जिम्मेदारी इसी कर्मचारी के पास थी। उसने कुछ महीने पहले करीब डेढ़ करोड़ रुपये जमीन खरीदी है।
यह सवाल उठ रहा है कि लगभग 18 से 20 हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक पाने वाला कर्मचारी इतनी महंगी संपत्ति का मालिक कैसे बन गया ? जांच में यह भी सामने आया है कि अब तक जिनको पकड़ा गया है, वे एक ही शिफ्ट में दानराशि की गणना करते थे। मिल्कीपुर निवासी अनुकल्प मिश्रा को इस समूह का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार उसे ट्रस्टियों और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त था। उस पर पहले भी भागवत कथा और शादी समारोहों में वैभव का प्रदर्शन करने के आरोप लग चुके हैं।
बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव आया था, लेकिन ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने यह कहकर इसका विरोध किया था कि ‘सब अपने ही लड़के हैं, यहां कैमरा लगाने की जरूरत नहीं है।’ बाद में एक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर कैमरे लगे और कुछ कैमरे गुप्त रूप से लगाए गए। संयोग रहा कि इन्हीं कैमरों ने उन चढ़ावा चोरों के चेहरे सामने लाए। गणना कक्ष में कार्यरत कर्मचारियों की वर्षों तक शिफ्ट नहीं बदली गई। उनकी नियमित तलाशी भी नहीं ली जाती थी। रामनगरी पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक मामलों में सरकार हस्तक्षेप नहीं कर रही है। सहायता मांगने पर सरकार विचार करेगी। ट्रस्ट ने भी संकेत दिए हैं कि पूर्व न्यायाधीशों की समिति से जांच का निर्णय लिया जा सकता है। रविवार सुबह ट्रस्ट पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक में भाग लेने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र शनिवार को अयोध्या पहुंचेंगे।
सीबीआइ जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका
श्रीराम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावा चोरी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने और सीएजी से आडिट कराने की मांग की गई है। यह याचिका स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक ने दाखिल की है। अगले सप्ताह इस पर सुनवाई संभावित है।

