Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं लाएगी सरकार
    • आरोपी को सुनवाई बगैर बरी करना अवैध: हाईकोर्ट
    • सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और अभेद सुरक्षा व्यवस्था के बीच जल चढ़ाएंगे शिवभक्त, अफसरों ने लिया तैयारियों का जायजा
    • बच्चों को मिले परीक्षा में बैठने की अनुमति, प्रधानाचार्य और लिपिक की सेवा हो समाप्त
    • अंग्रेजी भी पढ़़ाई जाएगी अब 235 साल पुराने वाराणसी के राजकीय इंटर कॉलेज में, अच्छी शुरुआत है
    • रोडवेज बसों में मुफ्त बस यात्रा बुजुर्ग महिलाओं को
    • हिन्दू उम्मीदवार बांग्लादेश में शेख हसीना की सीट पर
    • शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज के उत्तराधिकारी जगद्गुरु देवादित्यानंद होंगे
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»अदालतों में मुकदमों की संख्या कम करने हेतु छोटे मामलों का तुरंत हो निस्तारण, क्यों चला 7.65 रूपये का मुकदमा 50 साल
    देश

    अदालतों में मुकदमों की संख्या कम करने हेतु छोटे मामलों का तुरंत हो निस्तारण, क्यों चला 7.65 रूपये का मुकदमा 50 साल

    adminBy adminJanuary 19, 2026No Comments10 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    अदालतों में मुकदमों की बढ़ती संख्या और निस्तारण में होती देरी व मिलने वाले न्याय को लेकर हमेशा ही चर्चाएं होती रही हैं। इनमें कमी लाने के प्रयास भी कम नहीं होते। लेकिन मुझे लगता है कि १९७७ में चोरी के एक मामले में दो अज्ञात व्यक्तियों पर ७.६५ रूपये चुराने के आरोप और लिखाई रिपोर्ट का निस्तारण ५० साल बाद होना इस बात का भी प्रतीक है कि मुकदमों की फाइलों को संभालने वालों द्वारा ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए कोई विशेष प्रयास जजों के सामने लाकर नहीं किए जाते वरना गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी ना तो आरोपी और आरोपितों में से किसी का भी उपलब्ध ना होना यह दर्शाता है कि इस मामले का निस्तारण काफी पहले हो जाना चाहिए था। बीती १४ जनवरी को न्यायिक अधिकारी मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आरती कुलकर्णी द्वारा इस मामले को बंद करते हुए जो टिप्पणी की गई वो अलग है। उन्होंने कहा कि अगर शिकायतकर्ता उपलब्ध नहीं है तो उक्त राशि सरकारी खजाने में जमा कर दी जाए। मेरा मानना है कि यह मामला इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि मुकदमों की बड़ी तादात में ऐसे मामलों का बड़ा योगदान हो सकता है। इस प्रकार के जो मुकदमे दर्ज होते हैं उन्हें पहली तारीख में ही निस्तारण ना किए जाने से अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है। इस मामले से संबंध दोनों पक्ष ही उपलब्ध हो लेकिन भविष्य में ऐसे प्रकरण की तुरंत सुनवाई और फैसले के लिए विशेष अदालतों का गठन हो और माह में एक बार ऐसे सभी केस सुने जाएं और दोषी को सजा और आरोप सही नहीं है तो उन्हें रिजेक्ट किया जाना जरूरी है क्योंकि इससे आम आदमी को जल्दी न्याय मिलने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं लाएगी सरकार

    February 12, 2026

    आरोपी को सुनवाई बगैर बरी करना अवैध: हाईकोर्ट

    February 12, 2026

    सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और अभेद सुरक्षा व्यवस्था के बीच जल चढ़ाएंगे शिवभक्त, अफसरों ने लिया तैयारियों का जायजा

    February 12, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.