नई दिल्ली, 06 जुलाई (ता)। अमेरिका अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर एक ऐसा काम कर रहा है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही। राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 408 किलोग्राम का एक विशाल टाइम कैप्सूल जमीन में दफन किया जा रहा है। इसे अब नहीं, बल्कि पूरे 250 साल बाद यानी वर्ष 2276 में खोला जाएगा। इस कैप्सूल में आज के अमेरिका की संस्कृति, तकनीक, इतिहास और समाज को दर्शाने वाली कई खास चीजें रखी गई हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि 2026 का अमेरिका कैसा था।
टाइम कैप्सूल की खबर सामने आने के बाद भारत के भी एक पुराने अध्याय की चर्चा होने लगी। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में भी ऐसा प्रयोग आज से पांच दशक पहले किया गया था। यानी 50 साल पहले। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त 1973 को लाल किले के लाहौरी गेट के पास ‘कालपात्र’ नाम का टाइम कैप्सूल जमीन में दफन कराया था। इसे एक हजार साल बाद खोलने की योजना थी। हालांकि बीच में इसे निकाल लिया गया था।
खैर भारत के टाइम कैप्सूल की बात करने से पहले ये जान लेते हैं कि टाइम कैप्सूल क्या होता है? किस धातु से बनाया जाता है? अमेरिका का टाइम कैप्सूल दुनिया से कितना अलग है और क्यों है? टाइम कैप्सूल पर बाकी के देशों ने कितनी प्रगति की है? क्या वाकई टाइम कैप्सूल देश के इतिहास को बचाने के लिए अहम है? इतना ही नहीं साथ ही ये भी जानेंगे कि 2276 के लोगों के लिए अमेरिका आखिर क्या छोड़ रहा है? और ये 250 साल तक सुरक्षित कैसे रहेगा…?
टाइम कैप्सूल एक मजबूत और पूरी तरह सीलबंद कंटेनर होता है। इसमें किसी देश, समाज या संस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण चीजें, दस्तावेज, तस्वीरें, तकनीक, रिकॉर्ड और यादगार वस्तुएं सुरक्षित रखी जाती हैं। इसका उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों तक वर्तमान समय की असली तस्वीर पहुंचाना होता है। जब तय समय के बाद इसे खोला जाता है, तब उस दौर के लोग यह समझ पाते हैं कि सदियों पहले समाज कैसा था, लोग कैसे रहते थे, कौन-सी तकनीक इस्तेमाल करते थे और उस समय की सबसे बड़ी उपलब्धियां क्या थीं।
यही वजह है कि टाइम कैप्सूल को इतिहास और भविष्य के बीच एक पुल भी कहा जाता है। इसमें रखी जाने वाली हर वस्तु सोच-समझकर चुनी जाती है। कई बार इसमें संविधान की प्रति, अखबार, सिक्के, वैज्ञानिक उपकरण, किताबें, तस्वीरें, बीज, सांस्कृतिक वस्तुएं और डिजिटल रिकॉर्ड भी रखे जाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो टाइम कैप्सूल किसी भी दौर का जीवित दस्तावेज होता है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाता है।
अमेरिका का यह टाइम कैप्सूल सिर्फ एक धातु का डिब्बा नहीं, बल्कि 2026 के अमेरिका का संदेश माना जा रहा है। इसे फिलाडेल्फिया में इसलिए दफनाया जा रहा है, क्योंकि 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र को मंजूरी मिली थी और इसी शहर को अमेरिकी आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। इस बार आजादी के 250 साल पूरे होने पर उसी ऐतिहासिक जगह को चुना गया है।
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