अयोध्या, 18 जून (ता)। दान की राशि गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। प्रदेश के कई पूर्व डीजीपी का कहना है कि ये गंभीर आपराधिक कृत्य है। इसमें तत्काल केस दर्ज करना चाहिए। यही मांग आज देश की जनता भी कर रही है। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि रोजाना लाखों-करोड़ों का दान आता है। कहा जाता है कि सोना-चांदी, रत्न व हीरे जड़े आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। ये सामान्य अपराध नहीं है बल्कि महापाप है। मंदिर संचालन और दान प्रबंधन में जिस दक्षता व पारदर्शिता की आवश्यकता थी, वह दिखाई नहीं देती। एसआईटी का गठन किया गया है। इस मामले में अपराध पंजीकृत किया जाना चाहिए। मेरी राय में जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। करीब 300-400 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण हुआ है। ऐसे ऐतिहासिक व पवित्र स्थल में यदि सेंधमारी या वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों की पहचान कर उन्हें ऐसा दंड दिया जाना चाहिए, जो नजीर बने
इससे मंदिर की छवि खराब हुई, सख्त कार्रवाई हो: जैन पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि दान राशि के गबन का जो मामला सामने आया है, वह एक आपराधिक घटना है। इसमें केस दर्ज होना चाहिए। जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मंदिर प्रशासन के साथ पुलिस व अन्य एजेंसियों की बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई जाए। इस प्रकरण से छवि प्रभावित हुई है, इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। केस दर्ज कर विवेचना के लिए मुख्यालय स्तर से आईपीएस और एएसपी अधिकारियों वाली एसआईटी गठित करने की जानी चाहिए।
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