लखनऊ, 11 मार्च (अम)। उत्तर प्रदेश ने देश की अर्थव्यवस्था में मजबूत आर्थिक शक्ति केंद्र के रूप में पहचान बनाई है। इसमें जीडीपी की मजबूती, व्यापार करने की सुगमता, निवेश आकर्षक गंतव्य और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा मुख्य हैं। यह खुलासा उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई की यूपी पर शोध रिपोर्ट से हुआ है।
ये रिपोर्ट गत दिवस चैंबर के महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने इन्वेस्ट यूपी के सीईओ अभिषेक प्रकाश को सौंपी। इसमें यह संकेत दिया गया है कि राज्य एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। चैंबर के महासचिव ने रिपोर्ट के हवाले से कहा कि राज्य की जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद ) वर्ष 2020-21 में 16.44 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 25.47 लाख करोड़ हो गई है। राज्य की अर्थव्यवस्था 2017-18 से 2019 20 (मौजूदा मूल्य) के बीच औसतन 9.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी। कोविड महामारी के बावजूद 2021-22 से 2023-24 तक देश में 10वां स्थान औसतन 15.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एफडीआई में यूपी का पीएचडीसीसीआई का अनुमान है कि यूपी एक मजबूत मार्ग पर है जो उसे दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बना देगा। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था सेवा, कृषि और उद्योग तीन प्रमुख क्षेत्रों से संचालित है। सेवाओं में पर्यटन, रियल एस्टेट, वित्त और आतिथ्य शामिल हैं। इनका जीएसडीपी में 46.5 प्रतिशत योगदान है। कृषि में दो तिहाई श्रमबल खेती में लगा है और यह अर्थव्यवस्था में 27 प्रतिशत का योगदान देता है। उद्योग का जीएसडीपी में 26.5 प्रतिशत का योगदान है।
महासचिव डॉ. मेहता ने कहा कि यूपी देश में एफडीआई के मामले में 10वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश को बुनियादी ढांचे, उद्योग और प्रौद्योगिकी में लगातार निवेश की जरूरत है। प्रदेश में कौशल विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिकीकरण से प्रति व्यक्ति आय 2023 2024 में 93,514 रुपये तक पहुंच गई है जो पिछले वर्ष से 14 प्रतिशत ज्यादा है।
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