अयोध्या, 25 जून (ता)। जांच के दौरान SIT ने ऐसे करीब 150 सेवादारों और कर्मचारियों को चिन्हित किया है, जिनकी आर्थिक स्थिति 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद तेजी से बदली है। इनमें चंपत राय के करीबी माने जाने वाले फूलकांत मिश्रा का नाम भी शामिल है, जिनके पास से 25 लाख रुपये की 3 लग्जरी कारें मिली हैं। वहीं, दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास मिलने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
जांच टीम ने मंदिर परिसर में दान राशि की गणना, रिकॉर्ड संधारण, सुरक्षा व्यवस्था, CCTV निगरानी और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की। इस दौरान मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। सूत्रों के मुताबिक जांच में दान पेटियों की चाबियों, चढ़ावे के रिकॉर्ड और नकदी प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की गई। कुछ कर्मचारियों और सेवादारों की आर्थिक स्थिति में हुए बदलावों का भी विश्लेषण किया गया है।
सरकार द्वारा 13 जून को गठित SIT ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को 20 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी, जिसे अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेज दिया गया है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन और मंदिर के लिए एक सीनियर अफसर को CEO के रूप में नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही, पिछले 5 वर्षों के चढ़ावे का गहन ऑडिट कराने की सिफारिश भी की गई है। सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में गबन का खेल सालों से चल रहा था। मंदिर के सेवादार इस बारे में जानते थे, लेकिन प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण वे चुप थे। हाल ही में टिन्नू के बढ़ते प्रभाव से नाराज मंदिर के एक गुट ने सुनियोजित तरीके से उससे नजदीकी बढ़ाई, साक्ष्य जुटाए और पूरी जानकारी मीडिया तक पहुँचा दी, जिससे सालों से चल रहे इस कथित घोटाले की पोल खुल गई।
इस मामले में पहले कुछ कर्मचारियों और संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। जांच के दौरान कथित रूप से नकदी और अन्य सामग्री की बरामदगी भी हुई है। हालांकि कथित गबन या चोरी की कुल राशि को लेकर अभी कोई आधिकारिक अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।SIT द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर अब राज्य सरकार विचार करेगी। आगे की कार्रवाई, FIR दर्ज होने या अन्य कानूनी कदमों को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरण द्वारा लिया जाएगा।
राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे और दान राशि से जुड़ी किसी भी अनियमितता के आरोपों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की नजरें SIT की विस्तृत रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।गौरतलब है कि यह जांच अभी जारी है और मामले में किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक एवं कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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