लखनऊ 10 जनवरी। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने प्रदेश के तीन बड़े मदरसों की मान्यता निलंबित कर दी है. निलंबित किए गए मदरसों में मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम, मुबारकपुर, आजमगढ़, कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी, खलीलाबाद, संतकबीरनगर और मदरसा हनफिया जियाउल कुरान, शाही मस्जिद, बड़ा चांदगंज मड़ियांव, लखनऊ के नाम शामिल हैं.
आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर स्थित 78 वर्ष पुराने मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम की मान्यता निलंबित किए जाने का मामला सबसे अधिक चर्चा में है. मदरसा बोर्ड के अनुसार, यहां सहायक शिक्षक शमसुल हुदा खान पर गंभीर आरोप सामने आए हैं. जांच में पाया गया कि शमसुल हुदा ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके हैं और वर्ष 2007 से वहीं निवास कर रहे हैं. इसके बावजूद मदरसे से वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ ले रहे हैं.
मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बताया कि मदरसा प्रबंधन ने शमसुल हुदा को अवैतनिक अवकाश और चिकित्सा अवकाश के नाम पर अनियमित रूप से अनुपस्थिति की स्वीकृति दी.
इसके साथ ही विदेश में रहते हुए वेतन आहरण, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, पेंशन, जीपीएफ और अन्य देयों का भुगतान कराया गया. परिषद के अनुसार यह पूरा मामला राजकोष को वित्तीय क्षति पहुंचाने वाले संगठित कृत्य की श्रेणी में आता है. मदरसा सेवा नियमावली और वित्तीय अनुशासन के उल्लंघन के चलते मदरसे की मान्यता निलंबित की गई है.
लखनऊ के मड़ियांव स्थित मदरसा हनफिया जियाउल कुरान की मान्यता भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है. परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मदरसा परिषद द्वारा स्वीकृत स्थान पर संचालित नहीं पाया गया.
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि जिस भवन में मदरसे के संचालन का दावा किया गया, वह बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त प्राथमिक/जूनियर हाईस्कूल का परिसर है. यह मदरसे के नियंत्रण में नहीं है. इसके अलावा संबंधित भूमि और भवन को लेकर न्यायालय में वाद भी विचाराधीन है.
निरीक्षण के दौरान मानचित्र, कक्षाओं की व्यवस्था, कमरे का आकार, वेंटिलेशन और सुरक्षा मानकों में गंभीर असंगतियां पाई गईं. मदरसा न तो स्वामित्व संबंधी वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सका और न ही यह सिद्ध कर सका कि वह परिषद के मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा है.
परिषद ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत मदरसा प्रबंधन और प्रधानाचार्य को कई बार सुनवाई का अवसर दिया, लेकिन संतोषजनक जवाब और प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके. उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 के तहत कार्रवाई करते हुए मान्यता निलंबित कर दी गई.
इससे पहले संतकबीरनगर के खलीलाबाद स्थित कुल्लियातुल बनातिर रजविया मदरसे की मान्यता भी परिषद द्वारा निलंबित की जा चुकी है.

