नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागरिक सर्वाेपरि का सिद्धांत बहुत जरूरी है। साथ ही बदलते समय के साथ सिविल सेवाओं को लगातार अपडेट करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। साधना सप्ताह कार्यक्रम की शुरुआत पर एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के शासन को नागरिकों के लिए दैनिक आधार पर जीवनयापन की सुगमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए। पीएम ने कहा कि देश में शासन का सिद्धांत नागरिक देवो भवः के मंत्र पर आधारित है। सामूहिक भावना के साथ यह मंत्र सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सक्षम और नागरिकों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने का लक्ष्य रखता है।
जब हम प्रशासनिक सेवाओं में सुधार और बदलाव की बात करते हैं तो उसका एक आशय है कि लोक सेवकों के व्यवहार में बदलाव। हम सभी जानते हैं कि पुरानी देखा जाना चाहिए। पीएम ने कहा, देश के विकास पथ पर हमारे सिविल सेवकों के कार्यों का क्या प्रभाव पड़ेगा? हमारे एक निर्णय से कितने नागरिकों का जीवन बदल सकता है? हमारा व्यक्तिगत परिवर्तन संस्थागत परिवर्तन कैसे बन सकता है? यह प्रश्न हमारे हर प्रयास का हिस्सा होना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी को समझना और उसका सही उपयोग करना सार्वजनिक सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। आप तभी बेहतर प्रशासक और बेहतर लोक सेवक बन सकते हैं जब आप प्रौद्योगिकी और डाटा को समझें। यही आपके निर्णय लेने का आधार बनेगा, इसलिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और निरंतर सीखने को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है।
प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का आह्वान : प्रशासनिक संस्कृति में मूलभूत बदलाव का आह्वान करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पुरानी श्व्यवस्था में श्अधिकारीश् होने पर अत्यधिक जोर दिया जाता था, जबकि आज देश का ध्यान कर्तव्यनिष्ठा पर केंद्रित है। हर निर्णय से पहले, जब आप अपने कर्तव्य की मांग पर विचार करते हैं, तो आपके निर्णयों का प्रभाव स्वतः ही कई गुना बढ़ जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्थाओं के बीच तेजी से प्रगति कर रहा है और उसे अपनी शासन प्रणाली को निरंतर अद्यतन करना होगा। लोक सेवकों को याद दिलाते हुए कि आम नागरिक के लिए स्थानीय सरकारी कार्यालय पूरी सरकार का चेहरा है, मोदी ने कहा कि अधिकारियों की कार्यशैली और व्यवहार सीधे तौर पर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं।
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