सुप्रीम कोर्ट के ५२वें मुख्य न्यायाधीश अब सेवानिवृत जस्टिस बीआर गवई की देखरेख में तैयार श्वेत पत्र में कहा गया था कि यह जरूरी है कि माहवारी के दौरान महिलाकर्मियों को बिना बदनामी या नुकसान के अवकाश लेने के लिए सम्मानजनक आसान तरीका बनाया जाए। अगर ध्यान से सोचें तो उनका यह सुझाव महिलाओं के हित में कह सकते हैं। फिलहाल आजकल ना तो माहवारी ऐसी समस्या है जिसे छुपाया जाए या घर में बैठा जाए क्योंकि इस पर कई फिल्मे बन चुकी हैं और कितने संगठन माहवारी में इस्तेमाल होने वाले पैड के लिए जागरूकता फैला रहे हैं। महिलाएं बिना झिझक के पैड खरीदती दिखाई देती हैं। हर क्षेत्र में काम करने में भी वो परेशान महसूस नहीं होती क्योंकि सेनेट्री पैड के जो विज्ञापन आते हैं उनसे ऐसा ही अंदाजा होता है। लेकिन फिर भी इस बारे में अगर कुछ नीतिगत निर्णय हों और हर महिला को उनका लाभ मिले तो मुझे लगता है कि माहवारी अवकाश की नीति लागू करने में कोई हर्ज नहीं है।
पूर्व सीजेआई बीआर गवई अगर कोई सुझाव देते हैं तो सरकार उसे लागू करने और सामाजिक संगठन उसे अपनाने में देर नहीं करेंगे। यह ऐसी बात है कि इसे जहां लागू होना चाहिए वो उद्योग संस्थान भी विरोध में ना खड़े हों लेकिन जिस प्रकार हम कामकाजी महिलाओं को ऐेसे समय में अवकाश की बात कर रहे हैं जब कुछ उपाय अपनाकर काम किया जा सकता है तो मुझे लगता है कि घरेलू महिलाओं को भी इस योजना का लाभ सरकार की तरफ से मिले। अगर यह योजना लागू होती हेै तो कामकाजी महिलाओं को अवकाश का पैसा मिलेगा उसी प्रकार घरेलू महिला भी काम करती हेै तो उसे भी माहवारी के दौरान सरकार की तरफ से एकमुश्त रकम दी जाए।
जब हम बच्चे थे तो देखते थे कि परिवार की महिलाएं हर माह तीन चार दिन सभी कामों से अलग कर दी जाती थी और एक बार पढ़ा था कि कुछ जगहों पर इन्हें गांव से बाहर बनी कोठरियों में रहने के लिए मजबूर किया जाता था। अब ऐसा नहीं है। इस समय महिलाएं सभी काम करती है इसलिए आग्रह है कि अगर कामकाजी महिलाओं के लिए यह योजना लागू हो तो घरेलू महिलाएं इनसे भी ज्यादा काम करती हैं उन्हें भी सरकार लाभ दे क्योंकि माहवारी के नाम पर महिलाओं को पीड़ित नहीं किया जाता। जो अवकाश मिलेगा उसमें पूरा काम करेगी। मेरा मानना है कि हर माता बहन को ऐसी योजना का लाभ उपलब्ध कराने का मार्ग निकाले। जिस प्रकार सरकार कोरोना काल से लेकर अब तब उद्योगों में घरों से काम करने यानि वर्क होम की नीति पर काम कर ही है उसी प्रकार माहवारी के दौरान महिलाओं को घर पर ही काम करने की छूट दी जाए तो भी इस समस्य का समाधान हो सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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