नई दिल्ली/वाशिंगटन, 14 जनवरी। भारत दुनियाभर में सबसे अधिक मोबाइल मैलवेयर हमले झेलने वाला देश है। अमेरिकी क्लाउड सुरक्षा कंपनी जेडस्केलर की नई रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में होने वाले कुल मोबाइल हमलों में से 26 प्रतिशत भारत में देखे गए हैं।
जस्केलर ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि भारत मोबाइल मैलवेयर हमलों के लिए दुनिया का सबसे अधिक लक्षित देश बना हुआ है।
मोबाइल उपयोग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स को अपनाने में हो रही वृद्धि के साथ इसकी थ्रेटलैबज 2025 रिपोर्ट के आंकड़े चिंता पैदा करते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि साइबर हमलावर स्मार्टफोन, कनेक्टेड डिवाइस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष रूप से भारत जैसे तेजी से डिजिटलीकरण वाले बाजारों में ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
निष्कर्षों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर होने वाले मोबाइल मैलवेयर हमलों में भारत की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा निशाना बन गया है।
अमेरिका 15 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कनाडा 14 प्रतिशत पर है। हमलों में आई वृद्धि उल्लेखनीय है।
भारत में मोबाइल खतरों में पिछले वर्ष की तुलना में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका मुख्य कारण रोजमर्रा में मोबाइल ऐप्स, डिजिटल भुगतान और कनेक्टेड डिवाइस का बढ़ता उपयोग है। एंड्रॉयड मैलवेयर गतिविधि में पिछले वर्ष की तुलना में 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें स्पाइवेयर और बैंकिंग मैलवेयर प्रमुख खतरे बने हुए हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया है कि खुदरा और थोक कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जो हमलों का 38 प्रतिशत थे।
होटल व्यवसाय, रेस्तरां और मनोरंजन क्षेत्र 31 प्रतिशत प्रभावित हुए। विनिर्माण और ऊर्जा से संबंधित क्षेत्र पर भी असर पड़ा है। प्वज् खतरों में भारत 5 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर है।
रिपोर्ट में उजागर की गई सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि दुर्भावनापूर्ण ऐप्स विश्वसनीय ऐप स्टोर में कितनी तेजी से घुसपैठ कर रहे हैं। शोधकर्ताओं ने गूगल प्ले स्टोर पर होस्ट किए गए 239 हानिकारक एंड्रॉयड ऐप्स का पता लगाया, जिन्हें मिलाकर 4.2 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया गया था। इनमें से कई ऐप्स को उत्पादकता या वर्कफ्लो टूल के रूप में छिपाया गया था, जो यूजर्स के भरोसे का फायदा उठाने की एक रणनीति है।
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