मथुरा के चिंताहरण क्षेत्र के पास यमुना पुल पर बलदेव स्कूल की बस में अचानक आग लग गई लेकिन उसे रोकने की बजाय ड्राइवर लगातार बस को भगाता रहा। गनीमत रहीं कि वहां से होकर जा रहे पुलिस के एसआई सतेंद्र सिंह की नजर बस पर पड़ी और अपनी गाड़ी को बस के आगे लगाकर उसे रुकवाया और तीस बच्चों को बस से निकालना शुरु किया। दारोगा के इस काम को देखकर लोग भी बच्चों को बचाने में जुट गए और किसी की जीवन हानि नहीं हुई। सवाल उठता है कि बस में आग लगी फिर भी ड्राइवर को उसकी भनक तक नहीं लगी। अगर वीआईपी डयूटी कर लौट रहे सतेंद्र सिंह अपनी जिम्मेदारी को समझकर सक्रिय नहीं होते तो बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता। मेरा मानना है कि केंद्र व प्रदेश सरकार दरोगा सतेंद्र सिंह की कार्यप्रणाली ध्यान में रखते हुए उन्हें किसी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करे और जिला प्रशासन को भी उनका अभिनंदन करना चाहिए जिससे भविष्य में अन्य लोगों को इससे प्रेरणा मिले और ऐसी घटनाओं के होने पर वह देवदूत बनकर बच्चों को बचाने आए जैसा दारोगा द्वारा किया गया। कबाड़ा बसों को पेंट कर स्कूलों में चलाया जा रहा है और आरटीओ उनकी फिटनेस पर ध्यान नहीं देते। इसी तरह डग्गामार वाहन परिवहन विभाग की लापरवाही से सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। सरकार को इन पर रोक लगाने के लिए लापरवाही से दुर्घटना होने पर आरटीओ के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए क्योंकि ऐसी घटनाओं को सही नहीं कह सकते। खबर के अनुसार इस स्कूल बस में शॉर्ट सर्किट से आग लगना बताया जा रहा है। इसलिए आम आदमी के जान माल और बच्चों की सुरक्षा के लिए हानिकारक है। सरकार विशेष ध्यान दें।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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