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    Home»देश»दहलीज पर पति का शव और भीतर थमी पत्नी की सांसें, एक ही चिता, एक ही अग्नि
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    दहलीज पर पति का शव और भीतर थमी पत्नी की सांसें, एक ही चिता, एक ही अग्नि

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMarch 24, 2026No Comments5 Views
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    चित्तौड़गढ़ 24 मार्च। कहते हैं कि प्रेम की पराकाष्ठा शब्दों में बयान नहीं की जा सकती, उसे केवल महसूस किया जा सकता है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कांकरवा क्षेत्र से प्रेम और समर्पण की एक ऐसी ही रूहानी दास्तां सामने आई है, जिसने आधुनिक युग के खोखले रिश्तों को आईना दिखा दिया है। बावरियों का खेड़ा गांव में 90 साल की बुजुर्ग दंपती ने ‘मरते दम तक साथ निभाने’ के वादे को कुछ इस तरह निभाया कि पूरा इलाका इस अटूट बंधन को नमन कर रहा है।

    गांव के बेहद मिलनसार और सम्मानित बुजुर्ग हरिराम जाट पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उदयपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बावरियों का खेड़ा लाया गया, पूरे गांव में मातम पसर गया। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। पति के बिछड़ने की खबर मिलते ही उनकी बीमार पत्नी रानी बाई जाट ने भी कुछ ही पलों में अपने प्राण त्याग दिए। ग्रामीणों के लिए यह केवल संयोग नहीं, बल्कि एक आत्मिक जुड़ाव था। मानो रानी बाई अपने जीवनसाथी को इस दुनिया से अकेले जाने ही नहीं देना चाहती थीं।

    दंपती के इस अनोखे प्रेम को देखकर परिजनों और ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने तय किया कि जिस तरह इन दोनों ने जीवनभर एक-दूसरे का हाथ थामे रखा, अंतिम विदाई भी वैसी ही भव्य और साथ होनी चाहिए। पूरे गांव में बैंड-बाजे के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। यह दृश्य गमगीन होने के साथ-साथ गौरवपूर्ण भी था। बैंड की धुनों के बीच जब दोनों की अर्थियां कंधे से कंधा मिलाकर चलीं, तो हर आंख नम थी, पर दिल में इस जोड़ी के प्रति सम्मान अटूट था।

    शमशान घाट पर वह दृश्य सबसे मार्मिक था, जब एक ही चिता सजाई गई। हरिराम जाट और रानी बाई के पार्थिव शरीरों को एक साथ रखा गया और एक ही अग्नि के हवाले किया गया। आग की लपटों के बीच दोनों का अस्तित्व एक साथ पंचतत्व में विलीन हो गया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी मिसाल पहले कभी नहीं देखी, जहां मौत भी दो शरीरों को जुदा न कर सकी।

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