नई दिल्ली, 04 जून (ता)। इंडिया गैस फ्लेक्स इवेंट के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मारुति सुजुकी की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार से पर्दा उठाया है। इस मौके पर उन्होंने साफ कहा कि भारत को अब वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल्स की तरफ तेजी से कदम बढ़ाना ही होगा। चूंकि देश का 40 फीसदी वायु प्रदूषण अकेले ट्रांसपोर्ट सेक्टर की वजह से होता है, इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए यह लॉन्चिंग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा, भारत हर साल 22-23 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। इस कार के आने से देश की विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को नई उड़ान मिलेगी।
मारुति सुजुकी ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली हैचबैक वैगनआर को इस नए और एडवांस अवतार में पेश किया है। आइए नजर डालते हैं इसके सबसे खास फीचर्स और मैकेनिज्म पर फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (ICE): इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसका इंटरनल कंबशन इंजन को माना जा रही है। यह सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ E85 (85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल मिश्रण) वाले ईंधन पर भी पूरी ताकत से दौड़ सकती है।
मजबूत और अपडेटेड पार्ट्स: एथेनॉल के इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने के लिए कार के फ्यूल सिस्टम, इंजन कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स को खास तौर पर अपग्रेड किया गया है, ताकि कार की लाइफ और परफॉर्मेंस पर कोई असर न पड़े।
शानदार परफॉर्मेंस और बचत: यह कार न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण) को भारी मात्रा में कम करेगी, बल्कि ग्राहकों के लिए पेट्रोल के मुकाबले बेहद किफायती साबित हो सकती है।
कार्यक्रम में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि वायु प्रदूषण देश के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि स्वच्छ ईंधनों की ओर बढ़ना समय की मांग है। मंत्री का कहना है कि देश में होने वाले कुल वायु प्रदूषण का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा परिवहन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
हालांकि यह क्षेत्र उनके मंत्रालय के अंदर आता है, इसलिए प्रदूषण को कम करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। उन्होंने यह भी माना कि फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
22 लाख करोड़ रुपये के तेल आयात पर चिंता
इस दौरान गडकरी ने आर्थिक पहलू पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत हर साल फॉसिल फ्यूल के आयात पर करीब 22 से 23 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेल आयात को कम करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अगर देश को आयात घटाना और निर्यात बढ़ाना है तो वैकल्पिक ईंधनों और बायोफ्यूल्स पर ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा। यही आगे चलकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा का आधार बन सकता है।
ऑटो बाजार में तीसरे स्थान पर पहुंचा भारत
नितिन गडकरी ने जानकारी देते हुए कहा कि उद्योग का आकार लगभग 12 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन चुका है।
पहले भारत सातवें स्थान पर था, लेकिन बाद में जापान को पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान तक पहुंच गया। मंत्री ने यह भी कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग ने करीब 4.5 करोड़ युवाओं को रोजगार दिया है और जीएसटी के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों को सबसे अधिक राजस्व देने वाले प्रमुख उद्योगों में शामिल है।
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