एक दिन बाद नववर्ष २०२६ आ जाएगा तब तक हम वर्ष २०२५ की विदाई के लिए जश्न मनाने बधाई देेने में लगे रहेंगे। हर साल इन दिनों में ऐसा ही होता है। देखना यह है कि जो वर्ष बीता है और जो आने वाला है उसमें हमने क्या उपलब्धि प्राप्त की और भविष्य में क्या सोचते हैँ। समाज बहुत कुछ करना लेना देना चाहता लेकिन सुरक्षित माहौल की सबसे बड़ी जरूरत महसूस की जाती है जिससे हर व्यक्ति किसी समय घर से निकलकर अपने कार्य के लिए जा सके। कई माह पूर्व एक खबर पढ़ने को मिली कि एक लड़की ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें सुरक्षा के लिए बधाई देते हुए कहा था कि अब हम किसी भी समय घर से निकलते हैं। मीडिया में रोज तरह की बातों से हमारा सामने हो रहा है। अब ऐसा भी नहीं है कि यह सब आज ही हो रहा हो आदिकाल से सब तरह की घटनाएं होती चली आ रही है। देखना होता कि ईमानदार प्रयास कितने हुए और उनके परिणाम क्या निकलकर आए। पूर्ण रूप से कोई भी व्यवस्था लागू नहीं हो पाती है। लेकिन मन से मजबूत इरादों से प्रयास करना वक्त की मांग कही जा सकती है।
मेरठ एसएसपी विपिन ताडा द्वारा अपराध रोकने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार समाप्त करने आम आदमी का कानून पर विश्वास कराने के काफी प्रयास किए गए। जितनी खबरें पढ़ने को मिलती है उससे पता चलता है कि थानों व चौकियों में छापा मारने सड़कों पर चौकिंग करने का कार्य एसएसपी ने खूब किया। लापरवाही दिखाई देने पर वहां के पुलिसकर्मियों थानेदारों के क्षेत्रों में बदलाव किया गया। कुछ को पुलिस लाइन भेजने के साथ कितनो को निलंबित किया गया और थानेदारों की बैठकों में शासन के निर्देशों के तहत भयमुक्त माहौल बनाने के उपाय बताए गए। वो बात और है कि जितना होना चाहिए था वो नहीं हुआ लेकिन यह कहने में हर्ज नहीं है कि परिवार के मुखिया की भूमिका एसएसपी विपिन ताडा ने निभाने की पूर्ण कोशिश की। एसएसपी यह समीक्षा करें कि कहां क्या कमी रहे तो २०२६ में जनपद की कानून व्यवस्था में सुधार होने के साथ ही पुलिस की शह पर जो अतिक्रमण होते हैं वो रूक सकते हैं। नागरिक पुलिस भाई भाई का नारा पुलिसकर्मी अगर नागरिकों से अच्छा व्यवहार करेंगे तो साकार हो सकता है। मेरा मानना है कि थानों में जमे रहने और लोगों के इर्द गिर्द घूमने वाले थानेदार से लेकर एसएसपी तक आम आदमी को बुलाकर समस्या पूछे तो यह विश्वास से कहा जा सकता है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा जाने वाला सपना पूरा सपना सच हो सकता है। बस इन बैठकों में चापलूसों व दलालों को ना बुलाया जाए और सभ्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाए तो अपराधों में कमी आ सकती। मैंने देखा है कि दस साल पहले तक थाना स्तर तक संभा्रत नागरिकों से थानेदार और उच्चाधिकारी अच्छे सबंध रखते थे और कई बार घटना होने से पहले उसके बचाव के इंतजाम कर लिए गए क्योंकि नागरिक थानेदारों को घटना की संभावना की सूचना देते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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