देहरादून, 27 मई (ता)। उत्तराखंड के धार्मिक और ट्रैकिंग स्थलों में से एक हेमकुंड साहिब यात्रा, बर्फ से ढके पहाड़ों से होकर गुजरती है। यह बर्फ से घिरी एक झील है। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब सात बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरा हुआ है। इससे आप समझ सकते हैं कि यहां का नजारा कितना अद्भुत होगा। इसलिए इस जगह को सप्तशृंग के नाम से भी जाना जाता है। हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा सिखों का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। हेमकुंड साहिब की यात्रा हिंदुओं की पवित्र अमरनाथ यात्रा से भी जोड़ कर देखी जाती है। यहां दर्शन के लिए आने वाले लोग गुरुद्वारे के बाहर स्थित हिमालय की चोटियों के बीच हेमकुंड की झील में स्नान भी करते हैं। यह एक खूबसूरत झील है जो हिंदुओं और सिखों के लिए एक पवित्र स्थल है। गुरुद्वरा श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुल रहे हैं। यह यात्रा 10 अक्तूबर तक चलेगी। हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे की खोज 1930 में हवलदार सोहन सिंह ने की थी। समुद्र सतह से 4329 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस गुरुद्वारे का निर्माण 70 के दशक में पूर्ण हुआ। यहां पहले एक मंदिर था, जिसका निर्माण भगवान राम के अनुज लक्ष्मण ने करवाया था।
सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने यहां पूजा-अर्चना की थी। बाद में इसे गुरुद्वारा घोषित कर दिया गया। इस दर्शनीय तीर्थ में चारों ओर से बर्फ की ऊंची चोटियों का प्रतिबिंब विशालकाय झील में अत्यंत मनोरम एवं रोमांच से परिपूर्ण लगता है। इसी झील में हाथी पर्वत और सप्त ऋषि पर्वत श्रृंखलाओं से पानी आता है। एक छोटी जलधारा इस झील से निकलती है, जिसे हिमगंगा कहते हैं। झील के किनारे स्थित लक्ष्मण मंदिर भी अत्यंत दर्शनीय है। अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण वर्ष में लगभग 7 महीने यहां झील बर्फ में जम जाती है। फूलों की घाटी यहां का निकटतम पर्यटन स्थल है। हेमकुंड साहिब पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गोबिंदधाम से 19 किमी. पर्वतीय मार्ग की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह जगह सात पर्वत चोटियों में एक कुंड के पास है। हेमकुंड के पास सप्त ऋषि चोटियां हैं, जिन पर खालसा पंथ का प्रतीक निशान साहिब ध्वज लहराते हैं। हेमकुंड साहिब के कपाट साल में सिर्फ तीन-चार महीने के लिए ही श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। श्री हेमकुंड साहिब यात्रा पर जाने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान रास्ते में पडऩे वाले इन खूबसूरत स्थानों पर भी आप घूम सकते हैं।
वैली ऑफ फ्लावर्स- ऐसा कोई भी यात्री नहीं होगा, जो इस यात्रा के दौरान वैली ऑफ फ्लावर्स का नजारा देखने न जाए। उत्तराखंड राज्य के चमोली में स्थित यह जगह इतनी ज्यादा खूबसूरत है, जिससे आप अपनी नजरें हटा नहीं पाएंगे। यहां आप जितनी दूर नजर घुमाएंगे, उतनी दूरी तक आपको फूल ही नजर आएंगे। समुद्र तल से 3352 से 3658 मीटर ऊपर, फूलों की इस घाटी का नजारा देखने के बाद आपको एहसास होगा कि प्रकृति कितनी खूबसूरत है।
गोबिंद धाम- गोबिंद धाम और हेमकुंड साहिब के बीच की दूरी करीब 6-7 किमी. है। हालांकि, लोग यहां बहुत कम जाते हैं, क्योंकि इतनी चढ़ाई करना और भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन फिर भी जो लोग श्रद्धा रखते हैं, वह इस चढ़ाई को भी पूरा कर जाते हैं। हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह अंतिम पड़ाव है। कई लोग पहले हेमकुंड साहिब जाने के बाद गोबिंद धाम जाते हैं, तो वहीं कई लोग पहले गोबिंद धाम जाकर, नीचे उतरते हुए हेमकुंड साहिब रुकते हैं।
गोबिंदघाट गुरुद्वारा-हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु यहां रुककर आगे बढ़ते हैं। क्योंकि आगे की चढ़ाई मुश्किल होती है। गोबिंदघाट गुरुद्वारा में श्रद्धालुओं के लिए लंगर और रहने की भी सुविधा मिलती है। ट्रेक पर जाने से पहले श्रद्धालु यहां रुक कर शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को तैयार करते हैं।
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