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    Home»देश»सुरक्षा के साथ सेवा अमरनाथ यात्रा में
    देश

    सुरक्षा के साथ सेवा अमरनाथ यात्रा में

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJuly 4, 2026No Comments2 Views
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    बालटाल, 04 जुलाई (ता)। श्री अमरनाथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। हर साल देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसी को लेकर सीआरपीएफ के डीआईजी सुधीर कुमार ने यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, नई तकनीक, महिला जवानों की भूमिका और आपदा प्रबंधन को लेकर विस्तार से जानकारी दी। डीआईजी सुधीर कुमार ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि अमरनाथ यात्रा सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रही है और सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर इसे सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने0 के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यात्रा मार्ग पर आरओपी की जिम्मेदारी सीआरपीएफ निभा रही है। इसके अलावा सभी प्रमुख बेस कैंपों की सुरक्षा भी सीआरपीएफ के जिम्मे है, जहां श्रद्धालु यात्रा शुरू करने से पहले ठहरते हैं। सुधीर कुमार ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था में काफी बदलाव और सुधार देखने को मिला है। सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। उनका कहना है कि दोनों एजेंसियों का एक ही उद्देश्य है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ का काम केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। जवान मानवीय दृष्टिकोण से भी यात्रियों की हरसंभव मदद करते हैं। इसी उद्देश्य से श्मे आई हेल्प यूश् टीम बनाई गई है, जो रास्ते में किसी भी तरह की परेशानी का सामना कर रहे श्रद्धालुओं की तत्काल सहायता करती है। चाहे कोई रास्ता भटक जाए, स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या किसी अन्य प्रकार की मदद की जरूरत हो। सीआरपीएफ के जवान हर समय सहायता के लिए तैयार रहते हैं। डीआईजी ने बताया कि यात्रा के दौरान मेडिकल रेस्क्यू टीम (एमआरटी) की भूमिका भी बेहद अहम है। यह टीम प्राकृतिक आपदा या किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सक्रिय हो जाती है। उन्होंने कहा कि एमआरटी के सभी सदस्य विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हैं। इस वर्ष उन्होंने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ संयुक्त अभ्यास भी किया है। इससे उनकी क्षमता और बेहतर हुई है। उन्होंने बताया कि बालटाल मार्ग ऊंचाई और खड़ी चढ़ाई के कारण काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां कई श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन की कमी या हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए एमआरटी के पास पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। यदि किसी यात्री के पैर में चोट लग जाए, तबीयत बिगड़ जाए या किसी कारण से आगे बढ़ना संभव न हो तो टीम उसे सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाने का काम करती है। मौसम को यात्रा का सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण पहलू बताते हुए सुधीर कुमार ने कहा कि सीआरपीएफ लगातार मौसम विभाग के संपर्क में रहती है। मौसम में किसी भी बदलाव की जानकारी मिलते ही यात्रा को उसी के अनुसार नियंत्रित किया जाता है। सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पीए सिस्टम) के माध्यम से यात्रियों को लगातार जरूरी सूचनाएं दी जाती हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते उचित निर्णय लिया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान नई तकनीकों का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। बेहतर संचार व्यवस्था, मौसम की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। इससे किसी भी घटना पर तेजी से कार्रवाई करना संभव हो रहा है। महिला सीआरपीएफ जवानों की भूमिका पर बोलते हुए डीआईजी ने कहा कि आज महिला ट्रूपर्स सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय सहायता में भी पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। महिला श्रद्धालुओं की सहायता, सुरक्षा जांच और अन्य आवश्यक सेवाओं में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

    Amarnath Yatra Baltal Jammu Desh Service with safety during the Amarnath Yatra. tazza khabar tazza khabar in hindi
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