जयपुर 03 अप्रैल। राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में सफारी टिकट के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिसका सीधा असर अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों पर पड़ने लगा है. नई दरें लागू होते ही पर्यटकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है और इससे पर्यटन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
वन विभाग की ओर से सफारी शुल्क में की गई इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि पार्क के रखरखाव, वन्यजीव संरक्षण और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है. हालांकि, पर्यटक इस फैसले से खुश नजर नहीं आ रहे हैं.
नई दरों के अनुसार, जिप्सी और कैंटर सफारी दोनों के टिकट पहले के मुकाबले महंगे हो गए हैं. खासकर विदेशी पर्यटकों के लिए शुल्क में अधिक बढ़ोतरी की गई है. वहीं, ऑनलाइन बुकिंग के दौरान भी अतिरिक्त चार्ज बढ़ने से कुल खर्च और ज्यादा हो रहा है. ऐसे में परिवार के साथ घूमने आने वाले पर्यटकों को अब पहले से ज्यादा बजट तैयार करना पड़ेगा.
बदलाव के बाद अब इस तरह हो गई हैं कीमतें
कैंटर सफारी (20 सीटर) के लिए-
भारतीय पर्यटक : पहले ₹888 → अब बढ़कर ₹986.63 प्रति व्यक्ति
विदेशी पर्यटक : पहले ₹2176.10 → अब ₹2399.63 प्रति व्यक्ति
जिप्सी सफारी (6 सीटर) के लिए
भारतीय पर्यटक: पहले ₹1455.17 → अब ₹1611.80 प्रति व्यक्ति
विदेशी पर्यटक: पहले ₹2743.17 → अब ₹3024.80 प्रति व्यक्ति
यानी हर टिकट पर लगभग 100 से 300 रुपये तक का इजाफा हुआ है, जो परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ा खर्च साबित हो सकता है.
पर्यटकों का कहना है कि पहले ही रणथंभौर की सफारी काफी महंगी मानी जाती थी और अब कीमत बढ़ने से आम लोगों के लिए यहां घूमना मुश्किल हो सकता है. कई पर्यटकों ने यह भी कहा कि अगर इसी तरह कीमतें बढ़ती रहीं, तो वे अन्य सस्ते पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर सकते हैं.
स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता भी बढ़ गई है. होटल मालिकों, गाइड्स और ट्रैवल एजेंट्स का मानना है कि टिकट महंगे होने से पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ सकती है, जिसका असर उनके कारोबार पर पड़ेगा. रणथंभौर का पर्यटन भी पूरी तरह से सफारी पर निर्भर है, ऐसे में टिकट की कीमत बढ़ना पूरे इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकता है.
हालांकि, वन विभाग का तर्क है कि सीमित संख्या में ही पर्यटकों को एंट्री दी जाती है ताकि वन्यजीवों को कोई नुकसान न पहुंचे. ऐसे में शुल्क बढ़ाकर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है. साथ ही, इससे मिलने वाली राशि को संरक्षण कार्यों में लगाया जाएगा.
फिलहाल, टिकट दरों में हुई बढ़ोतरी को लेकर पर्यटकों और स्थानीय कारोबारियों में असंतोष देखा जा रहा है.

