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    Home»देश»राम मंदिर : एसआईटी ने शासन को सौंपी रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी से लेकर कमीशन के सुबूत
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    राम मंदिर : एसआईटी ने शासन को सौंपी रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी से लेकर कमीशन के सुबूत

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 23, 2026No Comments11 Views
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    लखनऊ,23 जून। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट एसआईटी ने मंगलवार सुबह अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी से लेकर कमीशनखोरी के खेल के सुबूत हैं। मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति, गणना प्रक्रिया में भी बड़े हेरफेर की आशंका एसआईटी ने जताई है। उससे संबंधित तमाम साक्ष्य जुटाए हैं। गवाहों का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है।
    एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन सुबह करीब 11 बजे शासन पहुंचे। तीनों अधिकारियों ने गोपनीय जांच रिपोर्ट संजय प्रसाद को दी। अब ये रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सामने रखी जाएगी।

    चंपत राय, अनिल मिश्रा व गोपाल राव का नाम शामिल
    सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर सबसे बड़ा सवाल उठाया गया है। कुछ की भूमिका भी उजागर की गई है। अंदेशा जताया गया है कि वह हेरफेर में शामिल रहे हैं। वहीं कुछ पदाधिकारियों को लापरवाही का दोषी पाया गया। जिनकी निगरानी में चढ़ावा चोरी हुआ। फिलहाल मामले में सबसे अधिक जो पदाधिकारी सवालों के घेरे में हैं, उनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा व निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम शामिल है। इसके अलावा इन पदाधिकारियों के रिश्तेदार व करीबियों का भी जांच रिपोर्ट में जिक्र है। खासकर चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, अनिल मिश्रा के रिश्तेदार, गोपाल राव के रिश्तेदार सोम आदि का।

    25-30 लोगों की भूमिका पाई गई
    सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी में सीधे तौर पर 25-30 लोगों की भूमिका पाई गई है। अब इन सभी पर जल्द केस दर्ज हो सकता है। वहीं अनिल मिश्रा पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोपों का भी जिक्र एसआईटी ने किया है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ट्रस्ट में बदलाव के साथ चोरी करने वालों पर कार्रवाई संभव है। हालांकि, एसआईटी का कहना है कि ये प्रारंभिक जांच है। विस्तृत जांच की जा रही है। अगले दो सप्ताह में विस्तृत जांच भी पूरी की जाएगी। इससे और सुबूत सामने आएंगे।
    आरोप है कि राम मंदिर के दान की राशि में गबन का यह सिलसिला करीब सवा साल तक बेरोकटोक चल रहा था। दान की रकम पार करने वाले संदिग्ध नियमित रूप से दानपात्रों से इकऋा रकम इधर से उधर कर रहे थे।

    कुछ मौकों पर ये हेरफेर अपने चरम पर रही…
    महाकुंभ और माघ मेले के दौरान पिछले साल हुए महाकुंभ और इस साल माघ मेले के समय जब प्रयागराज से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या दर्शन के लिए भी पहुंचे, तो चढ़ावे की राशि में बेशुमार बढ़ोतरी हुई। कथित गबन करने वालों के लिए यह समय बहुत सुनहरा साबित हुआ और गिनती करने वाले लोगों ने इसका फायदा उठाते हुए एक-एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये तक चंदे की राशि से पार किए।

    यह बात भी सामने आई कि पकड़े जाने से ठीक पहले, यानी आखिरी के कुछ महीनों में इन कर्मचारियों द्वारा बहुत बड़ी-बड़ी रकम पार की गई थी। इस तरह महाकुंभ से शुरू हुई यह चंदा चोरी लगातार सवा साल तक चलती रही और अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद किसी को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। सोशल मीडिया पर गबन की गई राशि 200 करोड़ से लेकर 1400 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है।

    कैसे हुआ राम मंदिर से इतना बड़ा गबन?
    राम मंदिर से दान राशि का इतना बड़ा गबन किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि यह नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद, सुरक्षा में भारी चूक और गिनती की प्रक्रिया में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर किया गया एक सुनियोजित खेल था।

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